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RSS बदल देगा इतिहास, प्रोजेक्ट का खुलासा

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2025 में अपनी स्थापना का शताब्दी वर्ष मनाने जा रहे राष्ट्रीय सेवक संघ (आरएसएस) ने भारतीय इतिहास का एक नया संस्करण दुनिया के सामने पेश करने का फैसला किया है।
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आरएसएस ने दस साल के प्रोजेक्ट की शुरूआत की है जिसका मकसद पुराणों पर आधारित भारतीय इतिहास लिखना है। संघ ने अपने इस प्रोजेक्ट को 'पुराणार्न्तगत इतिहास' नाम दिया है।

इस लेखन की खास बात यह होगी कि इसमें देश के 670 जिलों और 600 जनजातियों के इतिहास को भी लिखा जाएगा।

आगे जानिए क्यों खास होगा आरएसएस का यह इतिहास

साभार: इंडियन एक्सप्रेस
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गुजरात से होगी इसकी शुरूआत

अपने इस उद्देश्य को अमली जामा पहनाने के लिए आरएसएस से जुड़ी संस्‍था अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना (ABISY) ने आगामी 22 से 24 ‌अगस्त के बीच गुजरात के पालमपुर में एक वर्कशॉप का आयोजन किया है। इस वर्कशॉप में विभिन्न विश्वविद्यालयों के 100 इतिहासकारों को आमंत्रित किया गया है।

इतिहास लेखन के अपने इस प्रयास को प्रोत्साहित करने के लिए अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना ने दिल्ली के केशव कुंज स्थित आरएसएस मुख्यालय में भारतीय पुराण अध्ययन संस्‍थान की भी स्‍थापना की है।

हर जिले का भी होगा इतिहास

संघ प्रचारक बालमुकुंद पाण्डे के मुताबिक, 'आरएसएस इतिहास को सही परिदृश्य में देखना चाहता है। इतिहास महज इतिहास है और भारतीय इतिहास का मुख्य स्रोत पुराण ही है।' आरएसएस के वरिष्ठ नेताओं की मध्य प्रदेश के इंदौर में हुई बैठक में इस योजना पर चर्चा की गई थी।

हालांकि ‌अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना, इतिहास लेखन की अपनी योजना पर पहले से ही काम कर रहा है लेकिन इसमें जिलों के इतिहास को जोड़ने की बात इस मीटींग में ही तय की गई।

18 से ज्यादा है पुराणों की संख्या

संघ ऐसे लोगों की भी खोज कर रहा है जो अपने जिले का इतिहास लिख सकें। उन्हें संघ द्वारा हर संभव मदद उपलब्‍ध कराई जाएगी। पुराण पर आधारित इतिहास लेखन करने वाली संस्‍था 'अ‌खिल भारतीय इतिहास संकलन योजना' का मानना है कि पुराण की संख्या को केवल 18 तक सीमित करना गलत है।

असल में इनकी संख्या 106 है। संस्‍था का उद्देश्य इन सभी पुराणों को संकलित कर उनके आधार पर इतिहास लिखना है। ये सभी पुराण विभिन्न विश्वविद्यालयों, पुस्तकालयों और देश-विदेश में कई व्यक्तिगत संकलनकर्ताओं के पास हैं जिन्हें प्राप्त करने की को‌शिश संस्‍था कर रहा है।
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पुराण की इंसाइक्लोपीडिया का भी निर्माण

संस्‍था के मु‌ताबिक पुराण लिखित भारतीय इतिहास का सबसे प्राचीन स्रोत है। जिसमें ब्रह्मांड के निर्माण से लेकर सभी जरूरी बातों का वर्णन किया गया है। ज्यादातर पुराण संस्कृत में हैं, लेकिन कई का अन्य भाषाओं में भी इनका अनुवाद हो चुका है।

संस्‍था का मकसद केवल ‌इतिहास लेखन ही नहीं है। इस प्रयास में पुराणों के 8.5 लाख श्लोकों को भी संग्रहित किया जाएगा जिसके आधार पर 100 खंडों वाली पुराण आधारित इंसाइक्लोपीडिया का निर्माण होगा।

गौरतलब है कि अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना का गठन 1994 में आरएसएस द्वारा किया गया था।
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