दिल्ली के चिड़ियाघर में लंबे समय से बीमार चल रहे रॉयल बंगाल टाइगर रामा ने शुक्रवार को दम तोड़ दिया। इस मामले में चिड़ियाघर प्रबंधन कुछ भी स्पष्ट करने से बच रहा है। हालांकि सूत्रों के मुताबिक, टाइगर के मरने का कारण किडनी फेल होना बताया जा रहा है। टाइगर के खराब स्वास्थ्य के मामले को गंभीरता से लेते हुए चिड़ियाघर प्रबंधन की ओर से तीन सदस्यों की टीम को नियुक्त किया गया था।
सूत्रों के मुताबिक, रामा करीब 27 जुलाई से बीमार चल रहा था, जिसके चलते वह काफी परेशान भी था। शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे रामा ने आखिरी सांस ली। एक रिपोर्ट की मानें तो रामा की किडनी में क्रेटेनाइन व फासफोरस की मात्रा अधिक होने के कारण उसकी किडनी ने काम करना बंद कर दिया था।
रामा की खराब तबीयत के चलते वह काफी कमजोर हो गया था और उसने खाना-पीना भी कम कर दिया था। हालांकि बीते रविवार को रामा की तबीयत में सुधार हुआ था, जिसके बाद उसने एक दिन में 3 किलो मांस खाया था। रामा को पानी में ग्लूकोज मिलाकर पिलाया जा रहा था।
रामा बीमारी की वजह से चिड़चिड़ा हो गया था, जिसकी वजह से उसने बीते दिनों अपने कीपर पर भी हमला कर दिया था। इस घटना के दौरान कीपर उसे पानी दे रहा था। रामा की उम्र करीब पांच वर्ष थी। वहीं, एक टाइगर की औसतन आयु करीब 20 वर्ष होती है। वर्तमान में दिल्ली चिड़ियाघर में बिट्टू और करण नामक टाइगर हैं।
बिट्टू को वर्ष 2012 में भोपाल से लाया गया था, जबकि करण रॉयल बंगाल टाइगर है। वहीं चिड़ियाघर में वर्तमान में सफेद बाघों की संख्या करीब सात हैं, जिसमें दो नर व पांच मादाएं हैं। सूत्रों के मुताबिक, रामा को दिल्ली के चिड़ियाघर में वर्ष 2014 में मैसूर के चिड़ियाघर लाया गया था। रामा को बतौर गिफ्ट दिल्ली चिड़ियाघर को दिया गया था।