याचिका में व्याकरण संबंधी गलतियां
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पूजा मित्तल ने याचिकाकर्ता पूनम पांडे पर यह जुर्माना लगाते हुए कहा कि ऐसी याचिकाएं न्यायालय का समय बर्बाद करती हैं। याचिका में वाक्य जैसे द मी इज लेडी. ए लेटेस सिंपल फ्रेमनर (the me is Lady. a LATTES simple Framner) और द मीन लीबाउट वास इन डिप्रेशन (The mean Lebaut was in depression) जैसे असंगत और अर्थहीन वाक्य थे, जिन्हें अदालत ने स्पष्ट रूप से एआई टूल्स के उपयोग का परिणाम बताया।
मानवीय प्रयास की जगह बढ़ रहा तकनीकि हस्तक्षेप
मजिस्ट्रेट मित्तल ने अपने आदेश में टिप्पणी की कि मानव प्रयास की जगह तकनीकी हस्तक्षेप का इस्तेमाल कानूनी दस्तावेजों में बढ़ रहा है, जो चिंताजनक है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों के उन फैसलों का हवाला दिया, जिसमें एआई से तैयार दस्तावेजों या तर्कों पर चेतावनी दी गई है। अदालत ने कहा कि बिना संपादन के एआई का उपयोग कानूनी कार्यवाही को कमजोर करता है और न्याय की प्रक्रिया को प्रभावित करता है। याचिकाकर्ता पूनम पांडे ने मेहरौली पुलिस स्टेशन के एसएचओ को शिकायत भेजी थी, जिसमें कथित मौत की धमकियों का जिक्र था, लेकिन याचिका की खराब ड्राफ्टिंग के कारण उसे खारिज कर दिया गया। अदालत ने याचिकाकर्ता को चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोहराई गई तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।