गर्मी के मौसम में लोगों को लखनऊ से होने वाली रोस्टिंग से निजात मिल सकती है। पावर कारपोरेशन ने प्रस्ताव तैयार कर शासन से रोस्टिंग नहीं करने का अनुरोध किया है।
अधिकारियों ने लोकल स्तर पर रोस्टिंग का आश्वासन दिया है। इससे लोगों को लखनऊ स्तर से होने वाली इमरजेंसी रोस्टिंग से राहत मिलेगी।
गर्मियों में बिजली की समस्या से लोग परेशान रहते हैं। बिजली की डिमांड कई गुना बढ़ जाती है। इससे मैनेज करने के लिए लोकल स्तर पर रोस्टिंग की जाती है। साथ ही शासन स्तर पर लखनऊ से इमरजेंसी रोस्टिंग भी होती है।
ऐसे में सबसे ज्यादा समस्या उस समय होती है, जब लोकल रोस्टिंग खत्म होती है और इमरजेंसी रोस्टिंग शुरू हो जाती है। इसकी वजह से लोगों को कई बार छह से सात घंटे लगातार बिजली कटौती का सामना करना पड़ता है।
कई घंटे बिजली कटौती से लोगों का गुस्सा फुट पड़ता है। लोग सड़क जाम और अधिकारियों का घेराव तक कर लेते हैं। समस्या को देखते हुए पावर कारपोरेशन अधिकारियों ने टीएचए में इमरजेंसी रोस्टिंग नहीं करने का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा है।
जिसमें अधिकारियों ने इमरजेंसी रोस्टिंग लोकल स्तर पर करने की बात कही है। अधीक्षण अभियंता एमसी शर्मा ने बताया कि लखनऊ से जितने घंटे इमरजेंसी रोस्टिंग की जाती है।
उतने समय की रोस्टिंग लोकल स्तर पर करने का आश्वासन शासन को दिया गया है। इस पर मुहर लगती है, तो बिजली की समस्या से कुछ राहत मिलेगी।
बिजली कटौती के शेड्यूल को किया जा सकेगा मैनेज
इमरजेंसी रोस्टिंग लोकल स्तर से करने की इज्जात मिलती है, तो बिजली कटौती के शेड्यूल को मैनेज किया जा सकता है। अधिकारी अलग-अलग समय पर कालोनियों में दो से तीन घंटे की कटौती कर रोस्टिंग मैनेज कर सकते हैं।
इससे लोकल और इमरजेंसी रोस्टिंग का सामना लोगों को एक साथ नहीं करना पड़ेगा। साथ ही लोकल और इमरजेंसी रोस्टिंग एक साथ हो जाने से पांच से छह घंटे की कटौती से भी नहीं जूझना होगा।