नोएडा-ग्रेटर नोएडा में बसों के संचालन के लिए बनने वाले स्पेशल परपज व्हीकल (एसपीवी) अथॉरिटी प्रोजेक्ट को तगड़ा झटका लगा है। रोडवेज ने इस प्रोजेक्ट से अपना हाथ खींच लिया है। अब प्राधिकरण ने नए सिरे से प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा है।
हाल ही में लखनऊ में उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बैठक हुई, जिसमें डायरेक्टर्स ने निर्णय लिया कि इस कंपनी में रोडवेज शामिल नहीं होगा।
इसके पीछे तर्क दिया गया कि रोडवेज पहले से ही घाटे में चल रहा है। एक और कंपनी में शामिल होकर घाटे को बढ़ाने का कोई मतलब नहीं है। एसपीवी से पीछे हटने का औपचारिक पत्र भी पिछले सप्ताह प्राधिकरण को मिल गया।
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प्राधिकरण ने तत्काल नए सिरे से प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया। अबकी बार एसपीवी में नोएडा का हिस्सा 60 फीसदी और ग्रेटर नोएडा का 40 फीसदी तय किया गया है। पुराने प्रस्ताव में 90 फीसदी नोएडा व ग्रेटर नोएडा और 10 फीसदी रोडवेज का हिस्सा था।
तकनीकी अनुभव के कारण बसों के संचालन का जिम्मा रोडवेज को ही दिया गया था। अब नोएडा व ग्रेटर नोएडा मिलकर नया बस ऑपरेटर ढूंढने की बात कह रहे हैं।
एसपीवी के गठन के पीछे मकसद नोएडा-ग्रेटर नोएडा में परिवहन व्यवस्था को दुरुस्त करने का था। बस खरीदने से लेकर संचालन तक सभी इस अथॉरिटी के तहत किया जाना है।
एक साल से इसके लिए औपचारिकताएं भी पूरी कर ली गई थीं। अब नए सिरे से प्रक्रिया पूरी करनी पड़ेगी। अभी प्राधिकरण की बसों को नोएडा, ग्रेटर नोएडा और आसपास के शहरों में रोडवेज ही चलवा रहा है।