लिडार और डीजीपीएस तकनीक से होगा सड़कों का सटीक सर्वे
मोहित शुक्ला
पूर्वी दिल्ली। पूर्वी दिल्ली के सड़क नेटवर्क को आधुनिक, सुरक्षित और भविष्य की परिवहन जरूरतों के अनुरूप विकसित करने के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने व्यापक ट्रैफिक सिमुलेशन मॉडल और रोड सेफ्टी ऑडिट की योजना तैयार की है। इस पहल के तहत वर्ष 2056 तक की परिवहन आवश्यकताओं का आकलन किया जाएगा। इसका उद्देश्य बढ़ते यातायात दबाव, शहरीकरण और वाहनों की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि से उत्पन्न चुनौतियों का दीर्घकालिक समाधान तलाशना है।
पूर्वी दिल्ली के कई प्रमुख मार्गों और चौराहों पर बढ़ते यातायात के कारण अक्सर जाम की स्थिति बनती है। इससे यात्रियों का समय बर्बाद होने के साथ ईंधन की खपत और प्रदूषण भी बढ़ता है। इन समस्याओं से निपटने के लिए प्रस्तावित मॉडल में अगले तीन दशकों के यातायात रुझानों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा। इसमें आबादी के विस्तार, भूमि उपयोग में बदलाव और आर्थिक गतिविधियों के विकास को ध्यान में रखकर सड़क नेटवर्क की भावी जरूरतों का अनुमान लगाया जाएगा।
एआई, मशीन लर्निंग और लिडार तकनीक का होगा इस्तेमाल
इस परियोजना की प्रमुख विशेषता आधुनिक तकनीकों का समावेश है। पारंपरिक सर्वेक्षण पद्धतियों के साथ-साथ ट्रैफिक सिमुलेशन मॉडल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग और भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) का उपयोग प्रस्तावित है। वहीं, सड़कों और चौराहों की सटीक ज्यामितीय मैपिंग, डिजिटल टेरेन मॉडलिंग और क्रॉस-सेक्शनल विश्लेषण के लिए लिडार (लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग) तथा डीजीपीएस सर्वे तकनीक की मदद ली जाएगी। इन तकनीकों से सड़क की संरचना, उपलब्ध चौड़ाई, चौराहों की बनावट और यातायात प्रवाह का विस्तृत डिजिटल प्रारूप तैयार करने में मदद मिलेगी। इसके आधार पर विभिन्न यातायात परिदृश्यों का आकलन कर संभावित सुधारों की उपयोगिता परखी जा सकेगी। इससे सड़क विकास और यातायात प्रबंधन से जुड़े फैसलों को अधिक वैज्ञानिक बनाने में सहायता मिलेगी।
जाम घटाने और प्रदूषण पर नियंत्रण की उम्मीद
प्रस्तावित मॉडल के जरिए पीक आवर्स में यातायात के दबाव, प्रमुख बॉटलनेक और सिग्नल व्यवस्था का विश्लेषण किया जाएगा। सिग्नलों के बेहतर समन्वय और ग्रीन वेव प्रणाली जैसे उपायों से वाहनों के अनावश्यक ठहराव को कम करने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। इससे यात्रा समय और ईंधन की खपत में कमी लाने में मदद मिल सकती है। वाहनों की आवाजाही सुचारू होने से कार्बन उत्सर्जन और प्रदूषणकारी कणों को कम करने की दिशा में भी लाभ मिलने की उम्मीद है। साथ ही, रोड सेफ्टी ऑडिट के माध्यम से दुर्घटना संभावित स्थानों और सड़क डिजाइन से जुड़ी सुरक्षा खामियों की पहचान कर सुधारात्मक उपाय सुझाए जा सकेंगे।
डेटा आधारित योजना से बेहतर होगा परिवहन ढांचा
पीडब्ल्यूडी की यह पहल सड़क विकास को तात्कालिक जरूरतों तक सीमित रखने के बजाय दीर्घकालिक योजना से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आधुनिक सर्वेक्षण और डिजिटल विश्लेषण के आधार पर तैयार होने वाला मॉडल पूर्वी दिल्ली में सड़क क्षमता, यातायात प्रबंधन और सड़क सुरक्षा से जुड़े निर्णयों के लिए उपयोगी आधार बन सकता है। इससे क्षेत्र में सुरक्षित, सुगम और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन व्यवस्था विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।