गुरुग्राम रेलवे मंत्रालय का महत्वाकांक्षी आरओ-आरओ पायलट प्रोजेक्ट जिले में दम तोड़ने लगा है। औद्योगिक शहर होने के बावजूद ट्रांसपोर्टर इसमें दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं।
वहीं, ट्रांसपोर्टरों के ट्रकों की ऊंचाई भी इस प्रोजेक्ट की राह मेें रोड़ा बन रही है। 20 दिन में रेलवे को सिर्फ दो बुकिंग मिली हैं, जबकि उम्मीदें काफी थीं। इस ओर रूझान बढ़ाने के लिए भी रेलवे विभाग ने अब तक कोई माकूल बंदोबस्त नहीं किया है।
अगर ऐसे ही हालत रहे तो गुरुग्राम से मुरादनगर तक का यह प्रोजेक्ट जल्द ही बंद हो सकता है। दरअसल दो मार्च को रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने रोड पर ट्रैफिक कम करने, प्रदूषण में कमी लाने, रेलवे ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए आरओ-आरओ (रोड ऑन-रोड ऑफ) नाम से प्रोजेक्ट शुरू किया था।
इस प्रोजेक्ट को 6 महीने के लिए चलाए जाने की योजना बनाई थी, लेकिन 20 दिन में मात्र दो बुकिंग मिली हैं। अब जो ट्रांसपोर्टर आ रहे हैं, उसमें सबसे बड़ी बाधा ट्रकों की ज्यादा ऊंचाई की हो रही है।
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक केवल 4.45 मीटर तक की ऊंचाई वाले ट्रकों को ट्रेन में लोड किया जाने का प्रावधान है, जबकि सड़कों पर चलने वाले अमूमन ट्रक इससे अधिक ऊंचे हैं।
अधिकांश ट्रक ओवरलोड चलते हैं, जबकि रेलवे के नियमानुसार ट्रक ओवरलोड नहीं होने चाहिए। इसके कारण भी ट्रांसपोर्टर नहीं आ रहे हैं। हालांकि ट्रकों को लोड करने के लिए दो समय निर्धारित किए गए हैं। एक रात 11.30 बजे और दूसरा सुबह 08.30 बजे। इसी निर्धारित समय से गाड़ी को गढ़ी हरसरू रेलवे स्टेशन से रवाना किया जाएगा।
आरओ-आरओ रेलवे की इस योजना को स्थापित करने के लिए रेलवे के द्वारा हर संभव प्रयास किया जा रहा है। परिवहन मंत्रालय से भी बात की जा रहा है। निजी कंपनियों से भी संपर्क किया जा रहा है।- नीरज शर्मा , मुख्य प्रवक्ता, रेलवे विभाग