अस्पताल को पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी में डीएम कोर्स शुरू करने की मिली मंजूरी
बच्चों में हृदय रोग की बढ़ती समस्याओं एवं जटिलताओं को दूर करने में मिलेगी मदद
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अटल बिहारी वाजपेयी आयुर्विज्ञान संस्थान और डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल बाल हृदय रोग विशेषज्ञ तैयार करेगा। इसके लिए अस्पताल में बाल हृदय रोग डिवीजन में डीएम कोर्स की शुरूआत होने जा रही है। उत्तर भारत में पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी डीएम शुरू करने वाला आरएमएल तीसरा संस्थान होगा। यह कोर्स गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी से मान्यता प्राप्त होगा। हृदय रोग विशेषज्ञों के तैयार होने से नवजात और बच्चों में हृदय रोग की बढ़ती समस्याओं एवं जटिलताओं को दूर करने में मदद मिलेगी।
आरएमएल अस्पताल के बाल रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. दिनेश कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय ने पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी डीएम कोर्स शुरू करने को लेकर अनुमति दी है। वर्ष 2025-26 के लिए दो सीटों की मंजूरी दी गई है। इस कोर्स के शुरू होने से उत्तर भारत में आरएमएल अस्पताल नवजात शिशु और बच्चों के हृदय रोग के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा सकेगा। अभी पीजीआई चंडीगढ़ और एम्स दिल्ली में यह व्यवस्था है।
सरकार के इस आदेश से हर साल दो पोस्टग्रेजुएट मेडिकल छात्र बाल हृदय रोग में सुपर स्पेशलिटी डीएम कोर्स के अंतर्गत शिक्षा पा सकेंगे। छात्रों को विदेश की तरफ रुख नहीं करना पड़ेगा। देश में हर साल बाल हृदय रोगों के चिकित्सकों की संख्या बढ़ेगी। जिसका फायदा हमारे देश के उन परिवारों को होगा जहां बच्चों को कंजेटियल और एक्वायर्ड हार्ट डिफेक्ट्स हैं। उन्होंने कहा कि देश की आबादी को देखते हुए बाल हृदय रोग चिकित्सक एवं सर्जन की देश में काफी कमी है।
ज्यादातर बच्चों में जन्मजात दिल में छेद, वॉल्व में सिकुड़न और दिल की नसों में बनावट की समस्या देखने को मिलती है। अस्पताल बच्चों की इकोकार्डियोग्राफी की सुविधा 2010 से मौजूद है। जबकि बच्चों के लिए कैथ लैब का उद्घाटन 2019 में किया गया था। उसके बाद बाल हृदय रोग विभाग में बच्चों का कार्डियक आईसीयू वार्ड भी शुरू किया गया। अस्पताल में बाल एवं शिशु हृदय रोग के संपूर्ण इलाज की व्यवस्था है। जिसका कि कॉर्पोरेट अस्पतालों में खर्चा लाखों रुपए आता है। लेकिन सरकार के अस्पताल में गरीबों का इलाज लगभग मुफ्त में किया जाता है।