दलती जीवनशैली, बढ़ता स्क्रीन टाइम और कामकाज का दबाव मुख्य वजह
नई दिल्ली। बदलती जीवनशैली, बढ़ता स्क्रीन टाइम और कामकाज के दबाव के बीच लोगों की नींद प्रभावित हो रही है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार कम नींद लेने से तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। अस्पतालों में भी अनिद्रा और मानसिक तनाव से जुड़े मरीजों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी है।
विशेषज्ञों के अनुसार पर्याप्त नींद नहीं मिलने पर मस्तिष्क को पूरा आराम नहीं मिल पाता, जिससे व्यक्ति की एकाग्रता, कार्यक्षमता और भावनात्मक संतुलन प्रभावित होता है। देर रात तक मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरणों का उपयोग भी नींद की गुणवत्ता को खराब कर रहा है। मानव व्यवहार एवं संबद्ध संस्थान (इहबास) के वरिष्ठ मनोचिकित्सक एवं विभागाध्यक्ष डॉ ओम प्रकाश ने बताया कि नींद और मानसिक स्वास्थ्य का सीधा संबंध है। लगातार नींद की कमी तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं को बढ़ा सकती है।
पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक नींद न आने, बेचैनी या उदासी की समस्या बनी रहती है तो उसे विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यस्कों को प्रतिदिन सात से आठ घंटे की नींद लेनी चाहिए। नियमित दिनचर्या, स्क्रीन टाइम में कमी और संतुलित जीवनशैली बेहतर नींद और मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैं।