नई दिल्ली।
राउज एवेन्यू कोर्ट ने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें पूर्व डीएचएफएल प्रमोटर कपिल वधावन और धीरज वधावन के खिलाफ कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में आईपीसी की धारा 409 और 467 समेत अतिरिक्त आरोप तय करने की मांग की गई थी। अदालत ने कहा कि वह अपने आरोप-निर्धारण के आदेश की समीक्षा नहीं कर सकती, सिवाय लिपिकीय या टंकण संबंधी त्रुटियों को सुधारने का राउज एवेन्यू जिला अदालत के विशेष न्यायाधीश (सीबीआई) संजीव कुमार मल्होत्रा ने 29 अक्तूबर को यह आदेश पारित किया। सीबीआई ने धारा 216 सीआरपीसी के तहत 30 जुलाई 2026 को तय किए आरोपों में संशोधन की अर्जी दायर की थी। एजेंसी ने कपिल वधावन और धीरज वधावन के खिलाफ धारा 409 आईपीसी तथा दोनों भाइयों और सह-अभियुक्त एस.एम.एन. नकवी के खिलाफ धारा 467 आईपीसी के आरोप तय करने की मांग की थी। इसके अलावा सभी अभियुक्तों के खिलाफ धारा 120बी आईपीसी के तहत आपराधिक षड्यंत्र का व्यापक आरोप भी तय करने की मांग की गई थी।
विशेष लोक अभियोजक अनुपम एस. शर्मा ने सीबीआई की ओर से तर्क दिया कि धारा 216 सीआरपीसी अदालत को फैसला सुनाए जाने से पहले किसी भी चरण में आरोप बदलने या जोड़ने का अधिकार देती है। उन्होंने कहा कि साक्ष्य रिकॉर्डिंग अभी हाल ही में शुरू हुई है और केवल औपचारिक गवाहों की परीक्षा हुई है, इसलिए अभियुक्तों को कोई नुकसान नहीं होगा। वहीं, कपिल वधावन और धीरज वधावन की ओर से अधिवक्ता नागेश बेहल और विशाल गौरव ने विरोध करते हुए कहा कि सीबीआई उन मुद्दों को फिर से खोलना चाहती है, जिन पर अदालत ने 30 जुलाई के विस्तृत आदेश में पहले ही विचार कर फैसला सुनाया है।