आईजीआई एयरपोर्ट थाना पुलिस ने फर्जी वीजा, पासपोर्ट और अन्य यात्रा दस्तावेज बनाकर लोगों को विदेश भेजने वाले गैंग का खुलासा किया है। पुलिस ने दो एजेंटों को गिरफ्तार किया है, जो लोगों से 18 लाख रुपये लेकर उन्हें फर्जी तरीके से विदेश भेजते थे। इनके निशानदेही पर पुलिस ने आजादपुर स्थित कार्यालय पर छापा मारकर 12 भारतीय पासपोर्ट, सात नेपाली पासपोर्ट, विभिन्न देशों के 35 पीआर कार्ड, विभिन्न देशों के 26 वीजा, विभिन्न देशों के 2000 से ज्यादा खाली वीजा, खाली सीडीसी और विभिन्न देशों और हवाई अड्डों के 165 से ज्यादा जाली वीजा टिकट, 127 देश के वीजा बनाने के उपकरण, विभिन्न देशों के वीजा होलोग्राम, विभिन्न देशों के इमिग्रेशन की सील, आठ उच्च गुणवत्ता वाली प्रिंटिंग और लैमिनेटिंग मशीन, सील बनाने की मशीन, पासपोर्ट बनाने के उपकरण और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की है।
एयरपोर्ट पुलिस उपायुक्त तनु शर्मा ने बताया कि साल 2021 में गुरनूर सिंह की शिकायत धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज की गई थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि सोशल मीडिया के माध्यम से वह अमित गौर के संपर्क में आए। जिसने ऑस्ट्रेलिया का पर्यटक वीजा और अध्ययन वीजा मुहैया करवाने की बात कही। शिकायतकर्ता ने अपने आईईएलटीएस प्रशिक्षण संस्थान के पांच छात्रों को ऑस्ट्रेलियाई पर्यटक वीजा के लिए आरोपी के पास भेजा। अपने सहयोगी की मदद से आरोपी ने पीड़ितों से वीजा के लिए 18 लाख रुपये लिए। आरोपियों ने छात्रों के नाम पर पांच पर्यटक वीजा दिए। दूतावास से वीजा सत्यापन करने पर सभी वीजा फर्जी निकले। शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर पूरे गठजोड़ को तोड़ने के लिए एसआई नवीन मीणा के नेतृत्व में एक टीम गठित की।
चार एजेंट सभी देशों के फर्जी वीजा बनाने में माहिर
तकनीकी जांच करने के बाद पुलिस ने 11 सितंबर को अमित गौर को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में अमित ने बताया कि 2017 में कमीशन एजेंट टैगोर गार्डन निवासी चंद्रिका प्रसाद के माध्यम से नितिन, मंजीत और विजय नाम के एजेंटों के संपर्क में आया। नितिन नजरा, मंजीत और विजय कुमार सिंडिकेट के मास्टर माइंड हैं। तीनों आरोपी सभी देशों के फर्जी यात्रा दस्तावेज बनाने में माहिर हैं। जांच में पता चला कि तीनों पूरे भारत में काम कर रहे हैं और पंजाब और हरियाणा में सक्रिय एजेंटों को लगातार फर्जी दस्तावेज मुहैया करा रहे हैं। पुलिस ने एजेंट नितिन नजरा के संभावित ठिकानों पर छापेमारी की, लेकिन वह अपने घर से फरार हो गया था। वह लगातार अपना ठिकाना बदल रहा था। उसकी कॉल डिटेल खंगालने के बाद पुलिस ने 13 सितंबर को टैगोर गार्डन से गिरफ्तार कर लिया।
आजादपुर के मजलिस पार्क में बनाते थे फर्जी दस्तावेज
पूछताछ करने पर नितिन ने बताया कि वह अपने सहयोगी मंजीत और विजय के साथ काम कर रहा था। उन्होंने आजादपुर के मजलिस पार्क में एक कार्यालय बना रखा है। जहां फर्जी वीजा, पासपोर्ट व अन्य दस्तावेज बनाते थे। पुलिस ने मजलिस पार्क स्थित कार्यालय पर छापा मारकर सारा सामान बरामद कर लिया। पुलिस मंजीत और विजय की तलाश में दबिश दे रही है। मंजीत पर वसंतकुंज थाने और अपराध शाखा में धोखाधड़ी के दो मामले दर्ज हैं। वहीं विजय और नितिन पर अपराध शाखा और आरके पुरम थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज है।