युवा सैनिकों में यह कतई आभास नहीं था कि उनके पास हथियार पाकिस्तानी फौज की अपेक्षा ज्यादा अच्छे नहीं हैं। यही कारण है कि भारतीय फौज जज्बे के साथ पाकिस्तानी फौजियों से लड़ते हुए उन्हें धूल चटा दी और लाहौर तक कब्जा कर लिया था।
यूं कहें कि भारतीय फौज ने अपने मनोबल और जज्बे के साथ 1965 का युद्ध जीता था। इसी जज्बे ने पाकिस्तानी सेना के 100 टैंकों और 43 विमानों को ध्वस्तकर उसे मिट्टी में मिला दिया था।
यह कहना है सेक्टर-21ए निवासी रिटायर्ड मेजर जनरल एसके दत्त का, जिन्होंने 1965 की लड़ाई में हिस्सा लिया था। अपने अनुभव ‘अमर उजाला’ से साझा करते हुए दत्त ने कहा कि युद्ध के दौरान कभी ऐसा नहीं लगा कि पाकिस्तानी फौज, भारतीय फौज पर भारी है।
उन्होंने एनडीए के जरिये बतौर सेकेंड लेफ्टीनेंट कुमाऊं रेजीमेंट में कमीशन लिया था। पाकिस्तान से युद्ध छिड़ने के दौरान सेना में उनकी सेवा के छह साल बीते थे। युद्ध के दौरान उनके रेजीमेंट की तैनाती पंजाब प्रांत के गुरुदासपुर जिले के नैनकोट सेक्टर में थी।