गंगोह के रहने वाले थे धनेन्द्र कुमार
दक्षिण जिला पुलिस उपायुक्त अनंत मित्तल ने बताया कि सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी धनेंद्र कुमार परिवार के साथ हौजखास स्थित आर-15 में रहते थे। मूलत: गंगोह निवासी धनेन्द्र कुमार अपने इलाके के पहले आईएएस अधिकारी थे। वह 1967 बैच के हरियाणा कैडर के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी थे और विश्व बैंक के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर रहे थे।
घर में मौजूद थे पांच लोग
पुलिस उपायुक्त मित्तल ने बताया कि बुधवार देर रात करीब 11:18 बजे हौजखास थाना पुलिस को पीसीआर कॉल के जरिये आग लगने की सूचना मिली। स्थानीय पुलिस, दमकल विभाग और अन्य एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंचीं। उस समय घर में धनेंद्र कुमार, उनकी पत्नी मंजू गर्ग, बेटा और दो घरेलू कर्मचारी मौजूद थे। आग लगने से घर में धुआं भर गया, जिससे परिवार के लोग बाहर नहीं निकल सके। स्थानीय लोगों ने पुलिस व दमकल को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से सभी को बाहर निकाला और तुरंत अस्पताल पहुंचाया। आग बुझाने के लिए दमकल विभाग की दो गाड़ियों मौके पर पहुंची थी। दमकल कर्मचारियों ने करीब 1.40 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया।
धुएं से मौत होने की आशंका
पुलिस उपायुक्त ने बताया कि पूर्व अधिकारी धनेंद्र कुमार के शरीर पर किसी तरह की जलने के निशान नहीं मिले है, लेकिन अधिक धुआं अंदर जाने से उनकी हालत गंभीर हो गई थी। एम्स ट्रॉमा सेंटर में उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। डॉक्टरों के अनुसार बेटे की हालत स्थिर है।
क्राइम टीम ने मुआयना किया
घटना की सूचना मिलते ही क्राइम टीम ने मौके का निरीक्षण किया। इसके अलावा इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर द्वारा भी जांच कराई जा रही है, ताकि आग लगने के सही कारणों का पता लगाया जा सके।
प्रतिष्ठित डॉक्टर के बेटे थे
धनेन्द्र कुमार गर्ग गंगोह के प्रतिष्ठित चिकित्सक डॉ. अमरनाथ गर्ग के पुत्र थे। उन्होंने गंगोह के हिन्दू राष्ट्रीय इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट की शिक्षा प्राप्त की थी। इसके बाद वे प्रशासनिक सेवा में चयनित हुए और हरियाणा कैडर में अपनी सेवाएं दीं। लंबे प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान हरियाणा के मुख्य सचिव, सीसीआई चेयरमैन, नेशनल हाईवे अथॉरिटी के चेयरमैन, टेलीकॉम सचिव, जीएसटी चेयरमैन और एक्साइज कमिश्नर शामिल हैं। बाद में उन्होंने विश्व बैंक में एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में भी सेवाएं दीं। गंगोह क्षेत्र के विकास में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनके प्रयासों से चंडीगढ़-मेरठ वाया गंगोह हरियाणा रोडवेज बस सेवा शुरू हुई, जिससे क्षेत्रवासियों को पीजीआई चंडीगढ़ तक बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सकी। करनाल-बिडौली मार्ग के निर्माण और नगर के डिग्री कॉलेज से जुड़ी बाधाओं को दूर करने में भी उनकी अहम भूमिका रही। धनेन्द्र कुमार गर्ग अपनी सादगी, विनम्रता और मिलनसार स्वभाव के लिए नगरवासियों के बीच जाने जाते थे। उनके निधन से क्षेत्र ने एक सम्मानित व्यक्तित्व को खो दिया है।