सेना की तर्ज पर सुविधाओं की मांग को लेकर अर्धसैनिक बलों के रिटायर्ड जवान व उनके परिजन आगामी 3 नवंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री कार्यालय का घेराव करेंगे। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए कंफेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारी संपर्क करने में जुट गए हैं।
कंफेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तेवतिया का कहना है कि अर्धसैनिक बलों के जवान सेना के साथ देश की सुरक्षा में कंधे से कंधा मिलकर कार्य कर रहे हैं। संसद पर हमले से लेकर कई अहम अभियानों में अहम भूमिका निभाई है और प्राणों की आहुति दी।
इसके बावजूद सरकार उन्हें शहीद नहीं मानती है। वर्ष 2004 से दो अर्धसैनिक बलों की पेंशन समाप्त कर दी गई। सियाचिन में तैनात सैनिकों को विशेष भत्ता दिया जाता है, लेकिन बर्फीले इलाके में तैनात अर्धसैनिक बलों को ऐसी कोई सुविधा नहीं है, यहां तक कि उन्हें सैनिकों की तरह न तो अवकाश मिलता है और न बैरक या छावनी में रहने पर सैनिकों की तरह भत्ता मिलता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने सेना की तर्ज पर वन रैंक वन पेंशन का भरोसा दिया था। इसे अब तक पूरा नहीं किया गया है।