डीडीए के दिल्ली एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्राधिकरण का इस परियोजना से कोई लेना-देना नहीं है। पुनर्विकास परियोजना नई दिल्ली नगर निगम के क्षेत्र में है। इस संबंध में उसी को निर्णय लेना है। एनबीसीसी के प्रमुख प्रबंध निदेशक अनूप कुमार मित्तल का कहना है कि नेताजी नगर और नौरोजी नगर परियोजना में 10 फीसदी हिस्सा सामाजिक और
व्यावसायिक गतिविधियों वाला होगा। अधिवक्ता गोपाल शंकर नारायण ने कहा कि प्रस्तावों से स्पष्ट ही नहीं है कि किसको मकान दिया जाएगा। सरकार कह रही है कि वह अधिकारियों के लिए मकान बना रही है, जबकि मकान और दुकान का कोई वर्गीकरण नहीं है।
एनजीटी में अधिवक्ता अनिल सूद ने कहा कि नेताजी नगर में एनबीसीसी ने परियोजना संबंधी ब्रॉशर के भीतर कहीं भी ग्रीन कवर और ट्री कवर की बात नहीं कही है। एनबीसीसी को
पता नहीं है कि ग्रीन कवर और ट्री कवर में क्या अंतर है। बिना पेड़ों के ग्रीन कवर यानी घास के मैदान नहीं बचेंगे। देशी प्रजाति के काटे जा रहे पेड़ों की भरपाई नहीं हो पाएगी।
जीआरपीए बिना सरकारी फंड की परियोजना
जनरल पूल रेजिडेंशियल एकमोडेशन (जीआरपीए) के तहत सरकारी अधिकारियों के लिए मकानों की व्यवस्था करने को केंद्र ने 2016 में दक्षिणी दिल्ली की सात कॉलोनियों के पुनर्विकास को मंजूरी दी थी। इनमें नेताजी नगर, नौरोजी नगर, किदवई नगर, कस्तूरबा नगर, त्यागराज नगर, श्रीनिवासपुरी, मोहम्मदपुर कॉलोनी का नाम शामिल है। इसकी अनुमानित लागत 32,835 करोड़ रुपये है। इस पूरी परियोजना में सरकार खुद कोई बजट नहीं खर्च करेगी, बल्कि इन कॉलोनियों के जरिए ही फंड जुटाएगी।