सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू कराने के लिए दिल्ली सरकार के करीब आधा दर्जन अस्पतालों में बुधवार को डॉक्टरों की हड़ताल देखने को मिली। सुबह से ही अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की लंबी कतारें लग गईं।
आनन फानन में अस्पताल प्रबंधनों ने वरिष्ठ डॉक्टरों को तैनात कर मरीजों को उपचार दिलाया। उधर, शाम तक सरकार ने भी हड़ताली डॉक्टरों की मांग को पूरा करने के लिए लिखित आदेश जारी कर दिए। इसके बाद डॉक्टरों ने हड़ताल खत्म का एलान किया।
हालांकि इस बीच यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज (यूसीएमएस) का सीधे तौर पर यूजीसी से संबद्ध होने के कारण यहां के डॉक्टरों की मांग पूरी नहीं हो सकी।
फेडरेशन ऑफ रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (फोर्डा) के अध्यक्ष डॉ. सुमेध ने बताया कि रोहिणी स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल, लोकनायक, मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, जीबी पंत और संजय गांधी अस्पताल के रेजीडेंट डॉक्टरों की मांग पूरी होने के बाद हड़ताल खत्म कर दी है। जबकि जीटीबी अस्पताल के डॉक्टरों ने अभी तक हड़ताल जारी रखने का निर्णय लिया है।
फोर्डा उनके समर्थन में खड़ा है। डॉ. सुमेध का कहना है कि पिछले डेढ़ वर्ष से रेजीडेंट डॉक्टर दिल्ली सरकार के समक्ष सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू कराने की मांग कर रहे थे। उन्होंने बताया कि अगर बुधवार को लिखित आदेश प्राप्त नहीं होते तो गुरुवार से डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने वाले थे।