कन्हैया कुमार मामले की कवरेज के लिए अमर उजाला संवाददाता धीरज बेनीवाल सहित अन्य पत्रकार भी मौजूद थे। संवाददाता के साथ जो बीता वह इस तरह था...
केस की सुनवाई शुरू होने से पहले ही वकीलों ने नारेबाजी शुरू कर दी। संवाददाता ने वहां फौरन पहुंचकर जायजा लिया और माहौल का मोबाइल से फोटो लेने की कोशिश की।
आक्रामक दिख रहे वकीलों ने इसका विरोध करते हुए संवाददाता को पकड़ लिया और कथित रूप से साकेत कोर्ट में वकालत करने वाले एक वकील ने धमकी दी तथा मोबाइल छीन लिया। किसी तरह वकीलों ने संवाददाता का मोबाइल वापस किया और एक जानकार वकील ने संवाददाता को बचाया। यह पूरा माजरा सीसीटीवी में कैद हुआ है।
कोर्ट रूम के बाहर माहौल शांत होने के बाद संवाददाता और अन्य पत्रकार अंदर गए। वहां जेएनयू के शिक्षक और छात्र बैठे थे। कोर्ट रूम में बड़ी संख्या में पुलिस भी मौजूद थी। पुलिस मीडिया कर्मियों को वहां से निकालने की कोशिश कर रही थी और पत्रकार अपने अधिकार का हवाला देते हुए वहां डटे हुए थे।
वकीलों ने शुरू की धक्का मुक्की
जेएनयू के शिक्षकों की मौजूदगी की जानकारी मिलते ही करीब पचास वकील कोर्ट में पहुंचे और उन्हें वहां से निकालने लगे। जब शिक्षकों ने इसका विरोध किया, तो उन्हें धक्के देकर जबरन वहां से निकाला। इसके बाद वकील मीडिया कर्मियों को बाहर निकालने की मांग करने लगे।
कोर्ट के बाहर गलियारे में खड़े मीडियाकर्मी मोबाइल से मौके की सूचना अपने कार्यालयों को भेज रहे थे। वकीलों ने इस पर आपत्ति जताते हुए उनके साथ धक्का-मुक्की शुरू कर दी।
संवाददाता अमित पांडेय ने इसका विरोध किया, तो वकीलों ने उन्हें पकड़ लिया। वहां मौजूद कई पत्रकारों ने अमित को बचाने की कोशिश की, तो वकीलों ने सभी को बुरी तरह पीटना शुरू कर दिया।
यहां कई कई महिला पत्रकार भी मौजूद थीं। वकीलों ने इनके साथ भी धक्का-मुक्की शुरू कर दी और मारपीट करते हुए बदसलूकी की।
अमर उजाला के पत्रकार ने ली एक वकील के चैंबर में शरण
अमर उजाला संवाददाता किसी तरह एक वकील की मदद से वहां से निकले और बाहर आकर जानकार महिला वकील नेता से अमित को बचाने के लिए कहा। मौके की गंभीरता को देखते हुए संवाददाता कोर्ट परिसर से बाहर आया और गेट नंबर दो पर पहुंचा। यहां सभी पत्रकार मौजूद थे।
अमर उजाला संवाददाता ने पत्रकार राकेश के साथ एक वकील के चेंबर में शरण ली। वकील के जरिये महिला पत्रकार रितिका जैन व स्नेहा को चेंबर में बुलवाया और काफी देर वहां बैठाकर सांत्वना दी। माहौल शांत होने के बाद चेंबर से सुरक्षित निकालकर बाहर सड़क तक पहुंचाया।
कोर्ट की रिपोर्टिंग के करीब आठ साल के दौरान ऐसा मौका पहली बार आया जब वकीलों ने अपनी मर्यादा भूलकर पत्रकारों और महिला पत्रकारों को सरेआम पीटा व अपशब्द कहे। न्याय के मंदिर में इस तरह की अराजकता ने हैरान किया।
राजधानी के विधि पत्रकारों के लिए सोमवार का दिन काला दिवस रहा, जब पत्रकारों ने कोर्ट में पुलिस की मौजूदगी में भी खुद को असहाय महसूस किया। अदालत को न्याय का मंदिर कहा जाता है, लेकिन पटियाला हाउस कोर्ट परिसर में पत्रकारों को वकीलों की अराजकता का शिकार होना पड़ा।