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450 करोड़ की ऑक्सीजन मुफ्त इस्तेमाल करते हैं दिल्ली वाले, रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

Fri, 05 Feb 2021 11:50 PM IST
संजीव कुमार झा आशीष तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • दिल्ली के नेशनल जूलॉजिकल पार्क ने कराया सर्वे
  • सर्वे में सामने आई इकोलॉजिकल सेवाओं की कीमत
  • बताई थी सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने बताई थी 72 लाख रुपये सौ साल के एक पेड़ की कीमत
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नेशनल जूलॉजिकल पार्क - फोटो : Social Media
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विस्तार
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क्या आपको पता है कि दिल्ली वाले नेशनल जूलॉजिकल पार्क के पेड़ों से हर साल साढ़े चार सौ करोड़ रुपये की ऑक्सीजन समेत जीने की और कई ज़रूरतें पूरी करते हैं। दिल्ली के नेशनल जूलॉजिकल पार्क ने हाल में ही टेरी के साथ मिलकर ऐसी रिपोर्ट तैयार कराई है। इससे यहां के पेड़ों समेत जमीन और ईको सिस्टम सेवाओं की कीमत तय की गई है। सुप्रीम कोर्ट की एक कमेटी ने भी अपनी एक रिपोर्ट में पाया है कि सौ साल पुराने पेड़ की कीमत करीब 72 लाख रुपये होती है। पेड़ जितना पुराना होता जाएगा, उसकी कीमत उतनी ही बढ़ती जाएगी। 

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रिपोर्ट में सामने आई हकीकत
दिल्ली के नेशनल जूलॉजिकल पार्क की अथॉरिटी और टेरी ने मिलकर दिल्ली के मध्य में बसे जूलॉजिकल पार्क के ईको सिस्टम सेवाओं की कीमत निकाली। इसमें पाया गया कि दिल्ली वाले पूरे चिड़ियाघर की इकोलॉजिकल सेवाओं से तकरीबन साढ़े चार सौ करोड़ रुपये की ऑक्सीजन न सिर्फ निशुल्क लेते हैं, बल्कि बायोडायवर्सिटी कंजर्वेशन से भी पूरी दिल्ली लाभान्वित होती है। इस तरह के पेड़ों और पूरे इकोलॉजिकल सेवाओं के अपने अनोखे आर्थिक सर्वे के दौरान पाया गया कि बायोडायवर्सिटी कंजर्वेशन की कीमत एक साल में 27 करोड़ रुपये से ज्यादा है। इसमें पेड़ों से मिलने वाली ऑक्सीजन से लेकर खाद की कीमत, कार्बन डाई ऑक्साइड का बैलेन्स समेत कई महत्वपूर्ण तत्व हैं जो लोगों के काम आते हैं। 

32 करोड़ का रोजगार भी देता है यह पार्क
जानकारी के मुताबिक, 32 करोड़ रुपये से एक साल में रोजगार देने का भी काम इसी नेशनल पार्क से होता है। इसी ज़ू में सालाना तकरीबन 37 करोड़ रुपये से शोध का काम होता है, जो पर्यावरण को बचाने के लिए होता है। इससे न सिर्फ दिल्ली, बल्कि पूरे देश के लोग भी लाभान्वित होते हैं। साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये से ज़ू में मनोरंजन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा तय होती है, जिससे लोगों को रोजगार और लाभ मिलता है। बारिश के दौरान मिट्टी के कटाव से लेकर बारिश के पानी को रोकने और बचाने में (वॉटर कंज़र्वेशन) भी चिड़ियाघर के पेड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका है। 
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बेहद अनोखा है ईकोसिस्टम सर्विस सर्वे
जूलॉजिकल पार्क के निदेशक रमेश कुमार पांडेय कहते हैं कि यह अपनी तरह का बेहद अनोखा ईकोसिस्टम सर्विस सर्वे है। इसमें यह जानने की कोशिश की गई कि वन्य पारिस्थितकीय सेवाओं के मूल्य का आकलन किया जाए, जिसमें ऑक्सीजन की वैल्यू भी हो। पानी के कटान की कीमत से लेकर कार्बन डाई ऑक्साइड के बैलेंसिंग की भी कीमत आंकी जाए। शोध से लेकर खाद पानी की कीमत का भी आकलन हो। रमेश पांडेय कहते हैं कि जब कीमत के रूप में ऐसी चीजों की वैल्यू सामने आती है तो लोगों का रुझान उसकी ओर बढ़ता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे पर्यावरण भी बचेगा और लोग उसकी कीमत व अहमियत समझेंगे।

सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने बताई पेड़ की कीमत
सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने तय किया है कि सौ साल के एक पेड़ की कीमत तकरीबन 72 लाख रुपये से ज्यादा है। कोर्ट ने इसका आकलन पश्चिम बंगाल में बनने वाले एक ओवरब्रिज के लिए पेड़ों के काटने की मंजूरी के लिए दाखिल हुई याचिका के बाद किया था।

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