अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की डॉ. बीआर अंबेडकर सेंट्रल लाइब्रेरी में फेस रिकॉग्निशन सिस्टम उखाड़ फेंकने के मामले को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। इस संबंध में सोमवार को उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई है। एक अधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार पूरे मामले की रिपोर्ट जेएनयू कुलगुरु और प्रॉक्टर को सौंप दी गई है।
इस तोड़फोड़ से करीब 15-20 लाख रुपये का नुकसान पहुंचा है। छात्रों की इस अराजकता को स्वीकार नहीं किया जाएगा। दरअसल, शुक्रवार को जेएनयू छात्र संघ के नेतृत्व में छात्रों ने लाइब्रेरी के प्रवेश द्वार पर लगे फेस रिकॉग्निशन सिस्टम को उखाड़कर फेंक दिया था। इस दौरान छात्र संघ के पदाधिकारी भी मौजूद थे। बता दें कि जेएनयू सेंट्रल लाइब्रेरी में बाहरी प्रवेश को रोकने के लिए फेस रिकॉग्निशन सिस्टम लगाया गया था। अगस्त में लाइब्रेरी के रीडिंग रूम में टेबल पर जातिसूचक और आपत्तिजनक शब्द लिखने का मामला सामने आया था। जिसके बाद लाइब्रेरी में फेस रिकॉग्निशन सिस्टम लगाने की कवायद शुरू हो गई थी। उस समय भी लाइब्रेरी में खूब तोड़फोड़ और हंगामा हुआ था। उसके बाद प्रशासन ने इस मामले में समिति गठित कर दी थी और तब तक मशीन लगाने के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए थे। मगर, छात्र संघ का आरोप है कि प्रशासन ने छात्र संघ चुनाव के आयोजन के दौरान गुपचुप तरीके से सिस्टम को लगाया।