सेक्टर- 50 स्थित एक रेस्टोरेंट में अरहर की दाल में खेसारी की दाल मिलाकर परोसने का मामला सामने आया है। लखनऊ की लैब से खाद्य सुरक्षा एवं औषधि निरीक्षण विभाग को मिली रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई है। डॉक्टरों के मुताबिक, लंबे समय तक खेसारी के सेवन से व्यक्ति को पैरालिसिस (लकवा) हो सकता है। इस तरह के मामले सामने भी आए हैं।
खाद्य अधिकारी एसएन सिंह ने बताया कि सेक्टर-50 स्थित द कैस्पियन रेस्टोरेंट से अरहर की दाल का नमूना लिया गया था। लखनऊ से मिली रिपोर्ट में अरहर की दाल में खेसारी की दाल की मिलावट की पुष्टि हुई है। यह दाल सेहत के लिए हानिकारक है। अरहर की दाल जैसी दिखने वाली यह काफी सस्ती होती है।
मुनाफे के कारण दुकानदार और रेस्टोरेंट मालिक इसे अरहर की दाल में मिला देते हैं। उन्होंने बताया कि जारचा से लिए गए मावा में वसा की कमी, घी और सेंट्रल स्टेज मॉल से लिए गए पॉपकॉर्न सॉल्ट (नमक) के नमूने भी फेल हो गए हैं। नमक के पैकेट पर जरूरी जानकारियां नहीं थी, जो कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम का उल्लंघन है। ज्यादातर नमूने 2014 के अंत में लिए गए थे।
खेसारी की दाल को केसरी की दाल भी कहते हैं। यह मध्य प्रदेश में पाई जाती है और खेतों में अपने आप ही फसल के बीच में उग आती है। तड़का लगाने पर स्वादिष्ट लगती है। इस दाल का यदि लगातार लंबे समय तक सेवन किया जाए तो व्यक्ति को पैरालिसिस यानी लकवा हो सकता है। पैरालिसिस के कई ऐसे रोगी प्रकाश में आए हैं, जिन्होंने लंबे समय तक इस दाल के सेवन की बात स्वीकार की है।
- डॉ. एके शुक्ल, फिजीशियन, कैलाश अस्पताल
मिलावट खोरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है। अप्रैल से लेकर मई तक 31 मुकदमे दायर किए गए हैं। यहां से जांच के लिए भेजे जाने वाले खाद्य पदार्थों के तमाम नमूने फेल हुए हैं।
- विनीत कुमार, जिला खाद्य अभिहित अधिकारी
अब छापे से बच रहे अधिकारी
ग्रेटर नोएडा में पानी का नमूना लेने गए खाद्य अधिकारी एसएन सिंह पर हमले के बाद अब खाद्य अधिकारी नमूने लेने की प्रक्रिया से बच रहे हैं। एक अधिकारी का कहना है कि हर बार पुलिस सुरक्षा मिलना संभव नहीं होता है और बिना सुरक्षा के छापेमारी करना जान जोखिम में डालने के समान है।