यमुना के बाढ़ क्षेत्र की सफाई को लेकर प्रादेशिक सेना कंपनी को सौंपा गया जिम्मा वापस ले लिया गया है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने यह कंपनी प्रदान की थी। एनएमसीजी ने नदी की सफाई के प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए इस साल की शुरुआत में टीए कंपनी व दिल्ली सिविल डिफेंस टीम उपलब्ध कराई थी। हाल ही में एनजीटी को सौंपी गई रिपोर्ट में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने कहा कि प्रादेशिक सेना कंपनी का फैसला 30 जून से वापस लिया है। एनएमसीजी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह कंपनी दिल्ली में अस्थायी के तौर पर कार्यरत थी।
कंपनी को लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए दिल्ली लाया गया था, ताकि लोग यमुना में कचरा डालने से रोकें। यह एक छोटा सा विशेष अभियान था और यह अब खत्म हो गया है। डीपीसीसी ने ट्रिब्यूनल को सूचित किया है कि प्रादेशिक सेना कंपनी ने संवेदनशील प्रदूषण हॉटस्पॉट की निगरानी, चौकियों पर तैनात रहे और पूरे क्षेत्र में पैदल, वाहन और नाव से गश्त की। यमुना की सफाई का काम दो चरणों में किया जाना था। पहला वजीराबाद से आईटीओ बैराज और दूसरा आईटीओ से ओखला तक। पहले चरण के तहत सफाई पूरी हो चुकी है।
वहीं, जैव-रासायनिक ऑक्सीजन मिले तो नदी स्नान के लिए उपयुक्त मानी जा सकती है। मांग (बीओडी) तीन मिलीग्राम प्रति लीटर से कम और घुलित ऑक्सीजन (डीओ) पांच मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक है। दिल्ली में प्रतिदिन लगभग 792 मिलियन गैलन (एमजीडी) सीवेज उत्पन्न होता है।