सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के तमाम रिहायशी इलाकों में फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त करने का आदेश दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि फुटपाथ पर केवल पैदल यात्रियों का हक है। कोर्ट ने कहा कि अतिक्रमण हटाने के बाद फिर से फुटपाथ कब्जा करने वालों के घरों के बिजली, पानी, सीवर कनेक्शन काटने पर विचार करना चाहिए।
जस्टिस अरुण मिश्रा व जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने सोमवार को नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी), उत्तरी दिल्ली नगर निगम, पूर्वी दिल्ली नगर निगम, दक्षिणी दिल्ली नगर निगम और दिल्ली छावनी बोर्ड को अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया। सभी निकायों से अतिक्रमण करने वालों को 15 दिन के भीतर नोटिस भेजने को कहा है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि अपनी मर्जी से अतिक्रमण नहीं हटाने वालों से इसे हटाने का खर्च भी वसूला जाए।
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि दिल्ली में लोगों ने घरों के आगे स्थित फुटपाथों पर कब्जा कर लिया है। किसी ने बगीचा तो किसी ने सिक्योरिटी गार्ड के लिए केबिन बना लिया है। फुटपाथ पैदल यात्रियों के चलने के लिए है, न कि उस पर निर्माण करने के लिए। कोर्ट ने निर्देश दिया कि सिक्योरिटी गार्ड के लिए केबिन घर या परिसर के अंदर ही बनाया जाना चाहिए।
साथ ही रिहायशी कॉलोनी में एंबुलेंस, दमकल या पुलिस की गाड़ियों की सुगम आवाजाही के लिए एक लेन होना चाहिए। लेन के दोनों द्वारा पीली लाइन हो, जिसके अंदर वाहनों को पार्क किया जा सकता है। साथ ही इलाके में खुली जगह पर पार्किंग की सुविधा दी जा सकती है, इसके लिए मासिक शुल्क लिया जा सकता है।