रमजान के मुकद्दस महीने के दूसरे जुमा (शुक्रवार) पर मस्जिदों में भीड़ रही। आम दिनों के मुकाबले लोगों की तादाद ज्यादा रही। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि शहर की बड़ी मस्जिदों में शुमार जामा मस्जिद छोटी पड़ गई, लोगों को मस्जिद के बाहर, पार्क और मस्जिद से सटी दुकानों की छतों पर नमाज अदा करनी पड़ी। वहीं, एनएच-8 और सेक्टर-53 स्थित मस्जिद में भी लोगों का हुजूम रहा।
विभिन्न मजिस्दों में इमामों ने अपनी तकरीर में रमजान की अहमियत और रोजा रखने की फजीलत के बयान की। मस्जिदों में लोगों को बृहस्पतिवार से शुरू हुए रमजान के दूसरे असरा के बारे में बताया गया। जामा मस्जिद के मौलाना जमालुद्दीन ने बताया कि दूसरा असरा मगफिरत होता है। इसमें सभी को चाहिए कि वो अपने गुनाहों को याद कर अल्लाह से माफी मांगे। इस महीने की इबादत लोगों को नेक राह पर चलने का अभ्यास कराती है। रोजा रखना मुसलमानों के लिए बेहतरीन इबादत है। गर्मी को देखते हुए उन्होंने पानी पीने और प्यास से बचने के तरीके बताए।
इस दौरान रोजेदारों ने देश में अमन शांति और भाईचारे को बनाए रखने के लिए अल्लाह से दुआ मांगी। कौमी एकता और टूटते समाज को जोड़ने के लिए भी खुदा से बंदों ने दुआएं मांगीं। नमाज के बाद लोगों ने गरीबों को खैरात भी बांटी। इसके बाद दुकानों से सेवइयां, फेनी और फल की खरीदारी की। खजूर की दुकानों पर अधिक भीड़ देखी गई।