द्वितीय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने रंगदारी के मामले में गिरफ्तार ऋषभ भाटी, सौरभ, सलमान की रिमांड को करीब तीन घंटे तक चली बहस के बाद निरस्त किया है। हालांकि अदालत ने धारा-9/25(2) आयुध अधिनियम के अंतर्गत रिमांड को उचित माना और इसे स्वीकृति दी है, लेकिन इस मामले में आरोपियों को 18 अप्रैल तक अंतरिम राहत प्रदान की है।
आरोपियों के अधिवक्ता मिंटू करन भाटी व अधिवक्ता अर्जुन मावी ने मौखिक और लिखित रूप से आपत्ति दर्ज करते हुए रिमांड को निरस्त करने की याचना की थी। उन्होंने कहा कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए अपराध की धाराएं नहीं बनती हैं। गिरफ्तारी का कोई उचित कारण नहीं दर्शाया गया है और न ही विवेचक ने उच्चतम न्यायालय की दिशा-निर्देशों का पालन किया है। न तो कोई स्वतंत्र साक्षी है और न ही कोई ऑडियो या वीडियो साक्ष्य उपलब्ध है।
मामले की गहन समीक्षा के बाद न्यायालय ने पाया कि विवेचक द्वारा केवल एफआईआर और पुलिस हिरासत में दिए गए बयानों के आधार पर रिमांड की मांग की गई है, जबकि केस डायरी में न तो किसी स्वतंत्र गवाह का बयान है और न ही गिरफ्तारी का उचित कारण स्पष्ट किया गया है। इसके अलावा प्रस्तुत धाराओं में अधिकतम सजा सात वर्ष तक की है, जो कि न्यायिक रिमांड की दृष्टि से पर्याप्त नहीं मानी गई। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि आरोपियों को बीएनएस की धाराओं 115(2), 352, 351(2), 3(5), 308(4) के अंतर्गत रिमांड पर भेजने का कोई पर्याप्त आधार नहीं है, लेकिन धारा 9/25(2) आयुध अधिनियम के अंतर्गत उसे रिमांड पर भेजा जाना उचित है।
हालांकि अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने आर्म्स एक्ट के मामले में आरोपियों को जमानत प्रदान की है। अदालत ने आरोपियों की आयु को देखते हुए और अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने यह माना कि उसे अंतरिम जमानत दिया जाना उचित होगा। न्यायालय ने आदेश दिया कि आरोपियों को 25-25 हजार रुपये के दो जमानतदारों के साथ ही समान राशि का व्यक्तिगत बंधपत्र दाखिल करने की शर्त पर 18 अप्रैल तक के लिए अंतरिम जमानत पर रिहा किया है।