संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर की खराब वायु गुणवत्ता में सुधार लाने की दिशा में केंद्र सरकार की नई पहल अहम साबित हो सकती है। पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले डीजल ट्रकों तथा बसों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर उनकी जगह बीएस-6 और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की योजना से वायु प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। 9,585 करोड़ रुपये की इस योजना का उद्देश्य परिवहन क्षेत्र को अधिक स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल बनाना है। विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली में पुराने डीजल वाहन पीएम 2.5, नाइट्रोजन ऑक्साइड और ब्लैक कार्बन जैसे खतरनाक प्रदूषकों के प्रमुख स्रोत हैं। इनसे निकलने वाला धुआं न केवल वायु गुणवत्ता को खराब करता है, बल्कि अस्थमा, फेफड़ों की बीमारियों, हृदय रोग और कैंसर जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम भी बढ़ाता है।
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) के स्वच्छ वायु कार्यक्रम से जुड़े अधिकारी शुभम श्रीवास्तव के अनुसार, दिल्ली में स्थानीय स्तर पर होने वाले वायु प्रदूषण में वाहनों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक है। खासकर पुराने डीजल ट्रक और भारी वाहन प्रदूषण के सबसे बड़े कारणों में शामिल हैं। सर्दियों के दौरान इनसे निकलने वाला धुआं स्मॉग की समस्या को और गंभीर बना देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बीएस-6 और इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग से पीएम 2.5 और नाइट्रोजन ऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी आएगी। इससे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में सुधार होगा और लोगों को अधिक स्वच्छ हवा मिल सकेगी। साथ ही कार्बन उत्सर्जन घटने से जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में भी मदद मिलेगी।