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ये कैसा एलान: दिल्ली में किसानों ने बेचा गेंहू, फिर सरकार को आई घोषणा करने की याद; नहीं मिला MSP का फायदा

Wed, 29 Apr 2026 04:17 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

नया बांस गांव के किसान पंकज मान ने बताया कि उन्होंने 6 क्विंटल गेहूं बेचा, लेकिन एमएसपी पर खरीद न होने से उन्हें कम दाम पर ही संतोष करना पड़ा। वहीं खेड़ा खुर्द के किसान सुखदेव मान ने बताया कि उन्होंने 22 एकड़ में गेहूं बोया था, लेकिन 2350 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बेचना पड़ा, जिससे उन्हें करीब 3 लाख रुपये का नुकसान हुआ। 
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गेंहू खरीद केंद्र - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली सरकार ने गेहूं खरीद के नियमों में बड़ी छूट देकर किसानों को राहत देने की घोषणा की है, लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि राजधानी में ज्यादातर गेहूं पहले ही बिक चुका है। ऐसे में ये फैसला किसानों के लिए कितनी मददगार होगा, इस पर सवाल उठ रहे हैं।

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गुणवत्ता मानकों में सरकार ने दी थी ढील 
दिल्ली सरकार ने खराब मौसम से प्रभावित गेहूं की खरीद के लिए गुणवत्ता मानकों में ढील दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि अब 70 फीसदी तक चमक की कमी (लस्टर लॉस) वाला गेहूं भी खरीदा जाएगा। साथ ही, सिकुड़े और टूटे दानों की सीमा को 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया गया है, ताकि ज्यादा किसानों की फसल खरीद के दायरे में आ सके। सरकार का कहना है कि इस फैसले से किसानों को मजबूरी में कम कीमत पर फसल बेचने से बचाया जा सकेगा और उन्हें उचित दाम मिलेगा। छूट के तहत खरीदे गए गेहूं को अलग स्टॉक में रखा जाएगा, उसका अलग हिसाब रखा जाएगा और प्राथमिकता के आधार पर उसका इस्तेमाल किया जाएगा।

ये फैसला बहुत देर से आया
लेकिन दूसरी ओर, किसानों का कहना है कि ये फैसला बहुत देर से आया है। दिल्ली में इस साल गेहूं की बिक्री 10 अप्रैल से शुरू हो गई थी और सरकार ने अब तक एक दाना भी नहीं खरीदा। खराब मौसम के डर से किसानों ने जो दाम मिला, उसी पर अपनी फसल बेच दी। नरेला अनाज मंडी के आढ़ती करन सिंह के मुताबिक, इस बार गेहूं 2300 से 2400 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका, जबकि सरकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये था। अगर सरकार ये छूट मार्च में ही घोषित कर देती, तो किसानों को इसका सीधा फायदा मिल सकता था।

किसानों को लाखों का नुकसान
नया बांस गांव के किसान पंकज मान ने बताया कि उन्होंने 6 क्विंटल गेहूं बेचा, लेकिन एमएसपी पर खरीद न होने से उन्हें कम दाम पर ही संतोष करना पड़ा। वहीं खेड़ा खुर्द के किसान सुखदेव मान ने बताया कि उन्होंने 22 एकड़ में गेहूं बोया था, लेकिन 2350 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बेचना पड़ा, जिससे उन्हें करीब 3 लाख रुपये का नुकसान हुआ। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि अब जब दिल्ली में गेहूं बचा ही नहीं, तो सरकार खरीदेगी क्या।
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दिल्ली में गेहूं की पैदावार पहले से ही सीमित
शहरीकरण के कारण दिल्ली में खेती योग्य जमीन कम हो गई है और गेहूं का कुल उत्पादन करीब 20 से 30 हजार टन के बीच ही रहता है। ये फसल मुख्य रूप से नजफगढ़, बवाना और महरौली के बाहरी इलाकों में उगाई जाती है। हालांकि प्रति एकड़ उत्पादन अच्छा है और 20 से 25 क्विंटल तक गेहूं निकल जाता है। ऐसे में सरकार का ये कदम नीति के स्तर पर किसानों को राहत देने वाला जरूर है, लेकिन समय पर लागू न होने की वजह से इस बार इसका फायदा सीमित ही नजर आ रहा है। यदि अगले सीजन में सरकार ऐसे फैसले समय रहते लेती है तो किसानों को वास्तविक लाभ मिल सकेगा।
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