जज साहब अदालत में उपस्थित राजीव व करण उर्फ संजू ने मेरे पति की हत्या नहीं की बल्कि इन दोनों ने तो घायल पति को अस्पताल ले जाकर उसे बचाने का प्रयास किया था। दोनों को पुलिस ने पति की हत्या में फंसाया है। अदालत ने महिला के इस बयान पर भरोसा जताते हुए हत्या के आरोप से दोनों को बरी कर दिया।
तीस हजारी स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार ने अपने फैसले में बचाव पक्ष के अधिवक्ता मुकेश कालिया के तर्कों को स्वीकार करते हुए कहा कि मृतक भगत सिंह की पत्नी के अलावा उनके पुत्र व अन्य रिश्तेदारों के बयानों से भी स्पष्ट है कि आरोपी बनाए गए राजीव व करण को पुलिस ने घटनास्थल से गिरफ्तार नहीं किया।
दोनों उनके पड़ोसी है और गोली की आवाज सुनकर वे मौके पर पहुंचे व घायल भगत सिंह को अस्पताल पहुंचाने में सहायता की। अदालत ने कहा इसके अलावा पुलिसकर्मियों के बयान भी विरोधाभास पूर्ण है।
वहीं पुलिस ने कोई भी स्वतंत्र गवाह नहीं बनाया। अदालत ने पुलिस द्वारा मृतक के दिए बयानों पर संदेह जताते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष बिना शक अपराध साबित करने में असफल रहा है। ऐसे में वे दोनों को बरी करते है।