साल 2018 के पहले ही दिन देशभर के अस्पतालों में महिलाओं के लिए नया नियम लागू कर दिया गया है। अब से हर अस्पताल में महिला मरीज के साथ एक परिजन होना जरूरी है। डॉक्टर परिजन की मौजूूदगी में ही महिला का उपचार कर सकेगा।
इसी तरह नाबालिग रोगियों के साथ भी परिजन की उपस्थिति जरूरी होगी। आदेश सरकारी और निजी दोनों ही तरह के अस्पतालों में लागू रहेगा। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) ने पिछले महीने ही सभी अस्पतालों को आदेश जारी किया था।
इसके बाद देश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान एम्स और सफदरजंग सहित देशभर के अस्पतालों में इस पर पालन शुरू हो गया था। एमसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि लंबे समय से सरकारी और निजी अस्पतालों से सबसे ज्यादा शिकायतें महिला मरीज से परिजनों को न मिलने देने की मिल रही थीं।
आईसीयू, ओटी, पोस्ट ऑपरेशन थियेटर, प्रसव वार्ड आदि जगहों पर परिजन को दूर रखा जा रहा था। इसके चलते डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही के आरोप लगाए जा रहे थे। इन्हीं शिकायतों के मद्देनजर अस्पतालों को तत्काल इस गाइडलाइन पर काम करने का आदेश दिया गया।
एक महीने होगी मॉनिटरिंग
अधिकारी ने बताया कि जनवरी में इस आदेश को लेकर मॉनिटरिंग की जाएगी। इसके बाद सभी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों से इस संदर्भ में जानकारी मांगी जाएगी, ताकि हर अस्पताल को इस आदेश के दायरे में लाया जा सके।
अस्पताल में इलाज के लिए आई महिलाओं को किसी परिजन की निगरानी मेें इलाज कराने का मौका मिलेगा। एम्स, सफदरजंग और आरएमएल जैसे सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में इसे सबसे पहले लागू करने का आदेश दिया गया है। - डॉ. जगदीश प्रसाद, महानिदेशक, केंद्रीय स्वास्थ्य सेवाएं।