उत्तरी-पूर्वी दिल्ली में हिंसक घटनाओं की वजह से दिल्ली में इस साल की पहली छमाही में हिंसा के मामलों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि लॉकडाउन के कारण अन्य सभी तरह की आपराधिक घटनाओं में काफी कमी दर्ज की गई। इस साल हिंसा की 681 घटनाएं दर्ज हुईं, जबकि पिछले वर्ष इस तरह की केवल दो घटनाएं ही घटी थीं। हिंसा से जुड़े 752 मामले इस समय विभिन्न अदालतों में चल रहे हैं, जबकि इनसे जुड़े 85 विभिन्न मामले दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चल रहे हैं।
अपराध की गंभीर घटनाओं की तरह हल्के अपराध की घटनाओं में भी कमी आई है। दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक इस वर्ष की पहली छमाही में कम गंभीर अपराध के मामले पिछले वर्ष की 14,4140 घटनाओं की तुलना में कम होकर 12,0148 रह गए हैं। गत वर्ष 30 जून तक छिना-झपटी की 3320 घटनाएं घटीं थीं, जो इस साल 3063 हो गई हैं। सेंधमारी की घटनाएं 1678 से घटकर 926 रह गई हैं।
वाहन चोरी की घटनाओं में भी इस साल काफी कमी आई है। गत वर्ष की पहली छमाही में वाहन चोरी की 22,771 घटनाएं घटीं थीं, लेकिन इस वर्ष इनकी यह संख्या घटकर 14,656 रह गई हैं। घरों में चोरी की घटनाएं 1376 से घटकर 954 और अन्य चोरी की घटनाएं 93,936 से घटकर 61890 रह गई हैं।
लॉकडाउन के दौरान घरेलू हिंसा में बढ़ोतरी की आशंका जाहिर की गई थी, लेकिन दिल्ली पुलिस के आंकड़ों को मानें तो इस साल महिलाओं से होने वाली हिंसा में कमी आई है। पिछले वर्ष दुष्कर्म की 1074 घटनाएं घटी थीं, लेकिन इस वर्ष यह संख्या 60 फीसदी घटकर 636 रह गई है।
इसी प्रकार छेड़छाड़ की 1460 घटनाएं कम होकर 813 रह गई हैं। गत वर्ष महिलाओं के अपहरण की 1788 घटनाएं दर्ज की गई थीं, अब यह संख्या 1161 रह गई है।
पिछले वर्ष इसी अवधि तक दहेज उत्पीड़न की 1763 घटनाएं रिकॉर्ड की गईं थीं, जबकि इस वर्ष यह संख्या घटकर लगभग आधी यानी 887 रह गई है। पिछले वर्ष की 61 दहेज हत्याओं के मुकाबले इस वर्ष अब तक इस प्रकार की केवल 56 घटनाएं ही घटी हैं।