मुगलकालीन इतिहास को बयां करने वाले लाल किले में अब पर्यटक एक टच पर 1857 की ऐतिहासिक क्रांति, जलियांवाला बाग हत्याकांड और सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज की कहानी भी देख और सुन सकते हैं। यहां चार नए संग्रहालयों को आधुनिक तरीके से तैयार किया गया है। इनमें तकनीक का प्रयोग है। सभी संग्रहालयों में प्रोजेक्टर, एलईडी और टच स्क्रीन इन्फोर्मेशन डिस्प्ले लगाए गए हैं। पर्यटक अपनी रुचि के अनुसार एक टच पर मनचाही जानकारी हासिल कर सकते हैं। इन संग्रहालयों में जाने के लिए पर्यटकों को अतिरिक्त टिकट खरीदना होगा।
झांसी की रानी की शौर्यगाथा है खास
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने ब्रिटिश काल में बनाई गई बैरकों को संग्रहालयों के रूप में इस्तेमाल किया है। एएसआई ने इतिहास की घटनाओं के क्रमानुसार संग्रहालय बनाए हैं। बैरक-1 में 1857 की क्रांति को दर्शाया गया है। यहां मेरठ से क्रांति की शुरुआत से लेकर संपूर्ण देश में इसके प्रभावों को बेहतर ढंग से दिखाया गया है। इस क्रांति के उन पहलुओं को भी उजागर किया गया है, जिन्हें पहले ब्रिटिश साम्राज्य के डर से दबा दिया गया था।
इस संग्रहालय में झांसी की रानी लक्ष्मी बाई के शौर्य और बलिदान की गाथा को बखूबी तस्वीरों, लेखों, प्रोजेक्टर, डिजिटल स्क्रीन और टच स्क्रीन पर दिखाया व सुनाया जा रहा है। मेरठ में 1857 की क्रांति के केंद्र को नक्शे के साथ समझाया गया है।
यहां चर्बी वाले कारतूसों, रानीगंज, दीनाजपुर और बैरकपुर में ब्रिटिश अत्याचार, रुहेलखंड, कुमाऊं, लखनऊ, अवैध में युद्ध के प्रमुख केंद्रों और इस क्रांति का नेतृत्व करने वालों के बारे में विस्तार से चित्रों के साथ जानकारियां उपलब्ध कराई गई हैं। इसमें बताया गया है कि अंग्रेजों ने मुगल शहजादों मिर्जा मुगल, खिजर सुल्तान और मिर्जा अबू को गोलियों से भून डाला और 20 सितंबर 1857 को दिल्ली पर कब्जा कर लिया था।
याद आएगा जलियावाला बाग का क्रूर हत्याकांड
कलोनियल बैरक-2 में जलियांवाला बाग की याद में याद-ए-जलियां संग्रहालय बनाया गया है। इसे अंदर से जलियांवाला बाग जैसा बनाने की कोशिश की गई है। यहां अत्याधुनिक तकनीक से संग्रहालय की दीवार पर दीये जलाकर शहीद स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी गई है। जलियांवाला बाग में शहीद स्वतंत्रता सेनानियों के नाम भी दीवार पर नक्काशी से लिखे गए हैं।
यहां पर्यटकों को जलियांवाला बाग की बिना प्लास्टर की दीवारें भी दिखेंगी। जलियांवाला बाग गोलीकांड का वीडियो देखकर पर्यटकों के रौंगटे खड़े हो रहे हैं। बैरक की तीन मंजिलों में यह संग्रहालय बना है। यहां एक दीवार पर बताया गया है कि जलियांवाला बाग में 20 हजार लोग थे। डायर के आदेश में पर 90 सिपाहियों ने 10 मिनट में एक हजार से ज्यादा लोगों को मार गिराया था। इनमें से 120 के शव बरामद हुए थे।
आजाद हिंद फौज का समय बताएगी घड़ी
बैरक-3 में सभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज का ट्रायल हुआ था। यहां ऐसी घड़ी लगाई गई है, जो बताएगी कि इस फौज का इतिहास कितने साल और कितने दिन पुराना है।
यहां सुभाष चंद्र बोस के बचपन से लेकर मृत्यु तक के सभी पहलुओं को दिखाया गया है। इस संग्रहालय में बोस की तलवार-म्यान, उनकी कुर्सी, आजाद हिंद फौज के सैनिक का पहचान पत्र, आईएनए के पदक, उस वक्त के 100 रुपये और दस सेंट, फौज के मेजर और कप्तान के कंधों पर लगाए जाने वाले बैज दर्शाए गए हैं। यहां बोस के पूरे परिवार की तस्वीरें और अंग्रेजों की काली करतूतों को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है।
दृश्यकला संग्रहालय में देखें पेंटिग
बैरक-4 में दृश्यकला संग्रहालय में देशभर के नामी चित्रकारों की कृतियों को बेहद आकर्षक ढंग से पेश किया गया है। यहां रविंद्र नाथ टैगोर, अवनेंद्र नाथ, राजा रवि वर्मा, अमृता शेरगिल, रूसी पेंटर निकोलस रोरिक समेत 15 चित्रकारों की कृतियां रखी गई हैं।