इसका कारण दिल को नियंत्रित करना होता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा रिलीज होने के कारण यह दिल की पंपिंग को बंद कर देता है जिससे मरीज की मौत तक हो जाती है। कोविड के बाद ऐसे मामले बढ़े, लेकिन 80 फीसदी इससे अछूते रहे। 20 फीसदी मरीज गंभीर हुए। 5 फीसदी में स्थिति ज्यादा खराब हुई।
एम्स में आयोजित फार्माकोलॉजी कांफ्रेंस में कनाडा से आए भारतीय मूल के दिल के विशेषज्ञ डॉ. एन एस ढल्ला ने कहा कि 80 फीसदी कैंसर के मरीजों के मौत के पीछे दिल की बीमारी कारण होती है। कीमोथेरेपी की दवा के साइड इफेक्ट्स से दिल का रोग बढ़ता है।
दवाओं में हो रहा सुधार, इंजेक्शन का काम करेगी क्रीम
डॉक्टरों ने कहा कि दवाओं के विकास की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। एक समय बोटॉक्स जैसी दवाओं को इंजेक्शन देने की जरूरत होती थी। अब वहीं फायदा क्रीम से भी होने लगा है। इसे शरीर पर लगाने से ही फायदा मिलेगा। एम्स में फार्माकोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो डीएस आर्य का कहना है कि ये दवाएं कैंसर कोशिकाओं पर विशिष्ट प्रोटीन को पहचानती हैं और उन्हीं पर हमला करती हैं। इससे शरीर की अन्य स्वस्थ कोशिकाओं को कम नुकसान पहुंचता है।
आज की खोज, कल की दवा
देश में रोगों की दवाओं के लिए अभी विदेशों पर निर्भर होना पड़ता है। सम्मेलन में चर्चा किया गया कि देश में काफी क्षमता है। यदि युवा के साथ वैज्ञानिक इस दिशा में काम करें तो कई दवाओं का विकास हो सकता है। हमें विदेशी कंपनी की दवा की जरूरत नहीं रहेगी। यह सुरक्षित होने के साथ सस्ती व प्रभावी होंगी।
जड़ी-बूटी का खजाना
डॉक्टरों का कहना है कि देश में दवाओं के विकास की अपार संभावनाएं हैं। देश में जड़ी बूटी का खजाना है। इनकी मदद से भविष्य में कई रोगों का इलाज किया जाएगा। 30 नवंबर तक चले इस सम्मेलन में केंद्रीय राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव सहित अन्य विशेषज्ञों ने अपनी बात रखी।