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एनसीआर के लिए बन सकता है अलग से रेरा, लाखों फ्लैट खरीदारों की समस्या होगी दूर

Mon, 10 Sep 2018 05:27 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
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रियर एस्टेट हाउस
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हरियाणा की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में दो रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) के गठन का प्रस्ताव प्रदेश की उच्चस्तरीय कमेटी ने दिया है। दूसरा रेरा केवल एनसीआर के लिए गठित करने का प्रस्ताव है, जिसका मुख्यालय नोएडा या ग्रेटर नोएडा में हो सकता है। इससे पहले हरियाणा में भी रेरा का गठन किया गया था, लेकिन गुरुग्राम में ज्यादा समस्या होने से एक और रेरा का गठन किया गया है।

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दरअसल, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण के अधीन लाखों पलैट खरीदारों को मुश्किलों से उबारने के लिए उत्तर प्रदेश शासन ने केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय कमेटी का गठन 18 जून किया था। कमेटी ने 25 जून, 10 जुलाई और 3 अगस्त को बैठकें की। इसमें खरीदारों, बिल्डरों व अन्य संस्थाओं को बुलाकर समस्याएं सुनीं गईं। इसके अलावा दो बैठकें कुछ अन्य कंपनियों के साथ की गईं। इसके बाद एक रिपोर्ट तैयार की गई। इसी रिपोर्ट में कमेटी ने कुछ प्रस्ताव उत्तर प्रदेश सरकार, प्राधिकरणों व वित्तीय संस्थानों को दिए गए हैं। इसमें कहा गया है कि रियल एस्टेट एक्ट 2016 के मुताबिक जरूरत पड़ने पर एक से अधिक रेरा का भी गठन किया जा सकता है। उच्चस्तरीय कमेटी ने यह रिपोर्ट उत्तर प्रदेश शासन के मुख्य सचिव को दी है।

एक्सपर्ट बोले
हरियाणा के गुरुग्राम में ज्यादा समस्या थी। लिहाजा, गुरुग्राम के लिए अलग से एक और रेरा का गठन किया गया है। इसके अलावा जो एक और रेरा है वह पंचकूला में है और हरियाणा के बाकी शहरों के बिल्डर-खरीदारों के मामले देखता है। इसी तर्ज पर यूपी में भी उच्चस्तरीय कमेटी ने प्रस्ताव दिया है। हालांकि, नोएडा-ग्रेटर नोएडा में पहले से गठित रेरा की एक बेंच स्थापित हो चुकी है। अब यह कहना मुश्किल है कि प्रस्ताव के तहत दूसरे रेरा की यहां कितनी जरूरत है।
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- बलविंदर कुमार, सदस्य, यूपी रेरा

उच्चस्तरीय कमेटी ने यह भी दिए प्रस्ताव
- आरबीआई अलग से गाइडलाइंस बनाए और बैंकों को जारी करे, ताकि उनकी ओर से वित्तीय सहायता मिलने के बाद बिल्डर प्रोजेक्टों को उबारा जा सके।
- अंतिम समय में जो निवेशक पैसा लगाएगा उसे प्रोजेक्ट पूरा होते ही पहले चरण में ही फायदा लेकर बाहर जाने की अनुमति मिलेगी। यह लिफो विधि पर होगा यानी लास्ट-इन, फर्स्ट आउट।

- प्राधिकरणों की ओर से प्रोजेक्ट सेटलमेंट पॉलिसी (पीएसपी) फिर से लाई जाए। हालांकि, पहले की अपेक्षा में इसमें कुछ संशोधन होने चाहिए। यह संशोधन जीरो पीरियड को लेकर हो। इसमें प्रभावित भूमि के 10 से 30 प्रतिशत क्षेत्रफल के मुताबिक बिल्डर को 25 से 100 प्रतिशत तक की छूट का प्रस्ताव हो सकता है। तीन साल में अगर प्रोजेक्ट पूरा नहीं किया तो पीएसपी का लाभ नहीं मिलेगा।

- एक ही प्रॉपर्टी को बार-बार बेचने की शिकायतें मिली हैं। लिहाजा, अगर एक खरीदार बुकिंग कराता है तो उसे एग्रीमेंट टू सेल डीड की सब-रजिस्ट्रार के पास रजिस्ट्रेशन कराना होगा जिसकी फीस मामूली होगी। इससे दूसरे लोग फायदा नहीं उठा पाएंगे।
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- प्रदेश सरकार एक नीति बनाए। इसमें खरीदारों को टाइटल डीड का रजिस्ट्रेशन कराने की अनुमति मिले, जिन खरीदारों को समय सीमा के भीतर घर नहीं मिल पाए।
- प्राधिकरण वकीलों का एक पैनल तैयार करे, जो खरीदारों को रेरा में चल रहे केस की सुनवाई में मदद करे।

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