रियल एस्टेट रेगुलेटर कानून पहली मई से लागू होने जा रहा है। इससे अपने आशियाने की खरीददारी करने वालों को सहूलियत होगी। इसके बाद रियल एस्टेट डेवलपरों को तय समय में फ्लैट या मकान खरीददारों को देना होगा।
वहीं, मनमाने तरीके से डेवलपर खरीददारों पर नई-नई शर्तें नहीं थोप सकेंगे। हालांकि, जमीन और हाउसिंग राज्य का विषय होने से राज्यों को भी इसके लिये ठोस कदम उठाने होंगे। कानून के आधार पर डेवलपर की जिम्मेदारी होगी कि वायदे के अनुसार वह तयशुदा वक्त में बायर्स को फ्लैट का कब्जा सौंप दें।
डेवलपर अगर वादाखिलाफी करता है तो उस पर कार्रवाई होगी। वहीं, डेवलपर बीच में निर्माण सामग्री महंगी होने की बात करके फ्लैट की कीमत नहीं बढ़ा सकेगा। खास बात यह कि सारी प्रक्रिया पर रेगुलेटर की नजर होगी।
हालांकि, कानून लागू होने के बाद गेंद राज्यों के पाले में पहुंच जाएगी। केंद्र के कानून को मॉडल मानते हुये राज्य अपनी जरूरतों के हिसाब से थोड़ा फेरबदल करते हुये अपने कानून बनायेंगे। अधिसूचना जारी होने के एक साल के भीतर यानी 31 अप्रैल 2017 तक राज्य सरकारों को रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन करना होगा। जिन राज्यों में पहले से कानून हैं, वहां नया कानून लागू करना करना होगा। सभी राज्यों को केंद्रीय कानून की तर्ज पर 31 अक्टूबर अपने कानून बनाने होंगे।
500 मीटर से बड़े प्लॉट पर सोसायटी का रजिस्ट्रेशन होगा
संसद से पास कानून में 500 वर्ग मीटर से बड़े प्लॉट या 8 फ्लैट वाली सोसायटी को रियल एस्टेट रेगुलेटर अथॉरिटी के पास रजिस्ट्रेशन कराना होगा। हालांकि, राज्य सरकारों के पास अधिकार होगा कि वे प्लॉट साइज और फ्लैटों की संख्या कम या ज्यादा कर सकते हैं।
चरणबद्ध तरीके से लागू होगा कानून
अधिकारियों के मुताबिक, एक साथ कानून लागू होने से रियल एस्टेट सेक्टर में बड़ी अड़चनें पैदा हो सकती हैं। जैसे, बगैर रेगुलेटर के पास रजिस्ट्रेशन कराए प्रापर्टी डीलर काम नहीं कर सकता। वहीं, कोई भी बिल्डर रगुलेटर के पास रजिस्ट्रेशन करवाने के बाद ही फ्लैट बेच सकता है। खास बात यह कि कानून अधिसूचित होने के बाद ही रेगुलेटरी अथॉरिटी बनेगी। ऐसे में कानून को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का फैसला लिया गया है। दूसरी तरफ, अधिसूचित होने के बाद कानून से संबंधित शिकायतें आयेंगी। इसके लिये एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है।