फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रावण पर भी पड़ी कोविड-19 की मार, इस बार लंबाई घटकर हुई 10 फुट, बिक्री में भी गिरावट

Tue, 29 Sep 2020 02:32 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
रावण का पुतला - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

वैश्विक महामारी कोविड-19 के कहर से रावण भी नहीं बच पाया है। कोरोना की चपेट में आने से उसका कद लगभग 5 गुना कम हो गया है। जहां पिछले वर्ष दशहरे के मौके पर शहर में 50 से 60 फुट ऊंचा रावण का पुतला जलता नजर आता था। इस साल उसकी लंबाई केवल 10 से 20 फुट रह गई है।

विज्ञापन


टैगोर गार्डेन मेट्रो स्टेशन के समीप पिलर नंबर 446 के पास दशहरे के मौके पर सालों से रावण, कुंभकरण व मेघनाथ का पुतला बनाने वाले पुस्तैनी कारीगर सतपाल ने बताया कि 2 दिन पहले तक उनके पास पुतला बनाने का एक भी काम नहीं था। लेकिन 2 दिन के भीतर उन्हें 25 पुतले बनाने का ऑर्डर मिला है। इससे उनके व उनके साथ काम करने वाले मजदूरों को रोजगार की उम्मीद जगी है। लेकिन उन्होंने बताया कि इस साल अधिकतर लोगों ने महज 10 से 15 फुट लंबे पुतले ही बनवाने की पेशकश की है। जिन्हें बनाने के लिए 10 कारीगर काम पर जुटे हुए हैं। पिछले साल इस समय तक उन्हें 80 से 90 पुतले बनाने का ठेका मिला था। इनमें अधिकतर पुतलों का आकार आज की अपेक्षा बेहद बड़ा था। एक अन्य कारीगर महिंदर ने बताया कि पिछले साल उन्होंने 75 रावण बनाया था। लेकिन इस साल उन्हें अब तक केवल 4 पुतले बनाने के ऑर्डर मिले हैं। जिन्हें वह तैयार करने में जुटे हैं।

500 रुपये फुट बिकता है रावण
महिंदर ने बताया कि पिछले साल तक लगभग 500 से 550 रुपये फुट के हिसाब से पुतले बेचे जाते थे। इससे उन लोगों को चार पैसे की आमदनी हो जाती थी। लेकिन इस साल लोग इस कीमत पर पुतले खरीदने को तैयार नहीं हैं। जबकि पिछले साल की अपेक्षा पुतले बनाने में लगने वाले बांस, तार व रंगीन कागज का दाम बढ़ गया है।
विज्ञापन


दूसरे राज्यों में भी जाता था पुतला
दिल्ली के टैगोर गार्डन में बनाया जाने वाला रावण, कुंभकरण व मेघनाथ का पुतला मध्य प्रदेश, आसाम, उतर प्रदेश और हरियाणा में भी जाता था। कारीगरों ने बताया कि इस साल कोविड-19 महामारी के कारण दूसरे राज्यों से कोई ऑर्डर नहीं मिला है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें