दिल्ली सराय काले खां से मेरठ के मोदीपुरम तक प्रस्तावित हाईस्पीड ट्रेन (रेपिड रेल) प्रोजेक्ट को यूनियन कैबिनेट की बैठक में मंगलवार को हरी झंडी मिल गई। ऐसे में मेट्रो फेज-2 कॉरिडोर व उड़ान सेवा के टर्मिनल के उद्घाटन के साथ रेपिड रेल प्रोजेक्ट का भूमि पूजन एक साथ होने की संभावना बढ़ गई है। इससे पहले केंद्र सरकार ने रेपिड रेल प्रोजेक्ट के लिए अंतरिम बजट में नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (एनसीआरटीसी) को 1000 करोड़ रुपये का आवंटन किया था।
प्रोजेक्ट को कैबिनेट का एप्रूवल मिलने के बाद रेपिड रेल प्रोजेक्ट का काम रफ्तार पकड़ेगा। आरआरटीएस परियोजना में दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर पर प्रारंभिक पाइल लोड टेस्टिंग का कार्य शुरू हो गया है। भारत सरकार की ओर से फंड आवंटन होने से कॉरिडोर पर सिविल कार्य शुरू होने से पहले जियो टेक्निकल इंवेस्टिगेशन, रोड चौड़ीकरण, एचटी लाइनों के साथ अन्य यूटिलिटी डायवर्जन, प्रारंभिक पाइल लोड टेस्टिंग सहित अन्य काम तेजी से शुरू होंगे। हाईस्पीड ट्रेन में दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ रोड के कॉरिडोर में मेरठ में एक स्टेशन कम किए जाने से कॉरिडोर की लंबाई घटकर 82 किमी रह गई है।
गाजियाबाद में कुल सात स्टेशनों में साहिबाबाद इंडस्ट्रियल एरिया चौराहा से पहले, मेरठ रोड तिराहे के पास, गुलधर में विकासनगर के सामने, दुहाई में बीबीडीआईटी इंस्टीट्यूट के सामने, मुरादनगर, मोदीनगर नॉर्थ में आईसीआईसीआई बैंक के सामने और मोदीनगर साउथ में मोदी गार्डन के सामने स्टेशन शामिल हैं। हाईस्पीड रेल से 60 मिनट से भी कम समय में मेरठ से नईदिल्ली की दूरी तय की जा सकेगी। आरआरटीएस ट्रेन की डिजाइन स्पीड 180 किमी प्रति घंटा है, जबकि ऑपरेशनल स्पीड 160 किमी प्रति घंटा निर्धारित है। ट्रेन की औसत स्पीड 100 किमी प्रति घंटा होगी। रेपिड रेल प्रोजेक्ट की कुल लागत 30274 करोड़ है।
यूपी सरकार ने किया था 400 करोड़ का प्रावधान
रेपिड रेल प्रोजेक्ट के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से भी 400 करोड़ का प्रावधान किया जा चुका है। पहले से ही सेंट्रल कैबिनेट से 1000 करोड़ मिलने से काम और तेजी पकड़ेगा। 30274 करोड़ रुपये के रेपिड रेल प्रोजेक्ट में 60 फीसदी हिस्से के लिए एनसीआरटीसी मल्टीलेटरल व बिलेटरल लोन एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) से लोन लेगा। 18.7 फीसदी (5915.18 करोड़) अंशदान उत्तर प्रदेश सरकार का है।