दुष्कर्म पीड़िता को अब रिपोर्ट दर्ज करवाने के लिए थाने में नहीं जाना पड़ेगा। अस्पताल में भर्ती करवाने के तुरंत बाद संबंधित थाना पुलिस की महिला पुलिसकर्मी वहीं जाकर मामला दर्ज करेगी।
इतना ही नहीं पुलिस कार्यवाही से पहले पीड़ित को चिकित्सा प्रदान की जाएगी। यह जानकारी बुधवार को हाईकोर्ट में दी गई। अदालत ने इस पर तुरंत अमल करने का निर्देश दिया है।
16 दिसंबर के बिटिया मामले से सबक लेकर यह प्रावधान किया गया है। मामले में पीड़िता व उसका दोस्त कई घंटे तक सड़क पर पड़े रहे और चिकित्सा प्रदान करने में भी घंटों लगे थे।
न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल की खंडपीठ के समक्ष दिल्ली सरकार की अधिवक्ता ने बताया कि अब ऐसे मामलों में पीड़िता को थानों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। इस संबंध में जस्टिस वर्मा कमेटी की सिफारिश पर डीडीयू अस्पताल, संजय गांधी अस्पताल व गुरु तेग बहादुर अस्पताल में निर्भया सेंटर बनाए गए हैं।
तीनों अस्पताल से संबंधित थानों हरी नगर, मंगोलपुरी व दिलशाद गार्डन की पुलिस को सूचना मिलते ही जांच अधिकारी तुरंत अस्पताल जाएगी और बयान दर्ज करेगी। पूरी कानूनी कार्यवाही वहीं होगी और मामला दर्ज कर लिया जाएगा। इतना ही नहीं पीड़िता को अस्पताल पहुंचाने वालों से भी ज्यादा पूछताछ नहीं की जाएगी।
खंडपीठ ने इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि महिला पुलिसकर्मी अस्पताल में सादे कपड़ों में जाएंगी। इस पॉयलट प्रोजेक्ट पर तुरंत अमल किया जाए। खंडपीठ राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा के संबंध में दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है।
पुलिस ने इससे पूर्व बताया कि राजधानी में इस वर्ष 15 अक्तूबर तक कुल 1704 मामले दर्ज हैं जिनमें से अधिकांश में आरोपी पीड़िता के नजदीकी व जानकार हैं।