अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने दुष्कर्म और अपहरण के मामले में दोषी युवक की सजा को घटाते हुए कहा कि लड़की ने छाती पर आरोपी के नाम का टैटू बनवाया था और स्वेच्छा से उसके साथ मनाली गई थी। अदालत ने कहा कि 17 साल बाद युवक को फिर जेल भेजना न्याय की हत्या के समान होगा।
न्यायमूर्ति विमल कुमार यादव की अदालत ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि दोनों के बीच प्रेमपूर्ण रिश्ता था, हालांकि लड़की की उम्र के कारण यह रिश्ता कानूनी रूप से मान्य नहीं हो सकता था। इसलिए अदालत ने दोषी द्वारा पहले से बिताई गई करीब दो साल चार महीने की सजा को पर्याप्त माना। मामला जून 2009 का है। उस समय लड़की करीब 14 साल की थी और आरोपी करीब 18 साल का। लड़की घर से गायब हो गई थी और आरोपी के साथ पहले कनॉट प्लेस और फिर मनाली गई थी। दोनों दो दिन बाद दिल्ली लौटे थे। आरोपी को 2011 में दोषी ठहराया गया था। हाईकोर्ट में अपील के दौरान उसने सजा को चुनौती दी, दोषसिद्धि को नहीं।