शहीद विनोद कुमार ने शहादत से पहले न सिर्फ आतंकियों को मार गिराया, बल्कि अपने एक अधिकारी की जान भी बचाई। सीआरपीएफ के अधिकारियों ने परिजनों को फोन पर विनोद की बहादुरी की जानकारी दी। शहादत से विनोद के परिजनों में दर्द तो है, लेकिन गर्व की भी अनुभूति है।
शहीद विनोद के भाई वीरेंद्र उर्फ पप्पू ने बताया कि शुक्रवार देर शाम सीआरपीएफ के उच्चाधिकारी से उनकी फोन पर बात हुई थी। अधिकारी ने बताया कि विनोद आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन के दौरान गोली लगने के बावजूद आतंकवादी के पीछे भागे और ताबड़तोड़ फायरिंग कर आतंकी को मार गिराया।
उन्होंने बताया कि आतंकियों ने अचानक फायरिंग की उस समय विनोद के साथ एक सीनियर अधिकारी भी थे। विनोद ने सूझबूझ का परिचय देते हुए अधिकारी को साइड करके बचाया और खुद आतंकी पर टूट पड़े। आमने-सामने की इस मुठभेड़ में विनोद को भी गोली लगी, लेकिन वह पीछे नहीं हटे।
बेहद सरल था विनोद का स्वभाव
ग्रामीणों ने बताया कि शहीद विनोद का स्वभाव बेहद सरल और सौम्य था। 6 फीट 2 इंच लंबे विनोद बेहद निडर स्वाभाव के थे, उनका कभी किसी से झगड़ा नहीं हुआ। गांव के युवाओं को वह हमेशा छोटे भाई के नजरिए से देखते थे। गांव के लोगों ने बताया कि जब कभी भी वह छुट्टी पर आते थे तो सभी के साथ समय बिताते थे।