रामलीला मैदान में अरविंद केजरीवाल को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने के लिए शासन को तमाम औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।
इसके लिए उत्तरी दिल्ली नगर निगम में बुकिंग करानी होगी। उसका शुल्क जमा करना होगा। फिर दिल्ली पुलिस से एनओसी मिलने के बाद ही रामलीला मैदान का उपयोग किया जा सकेगा। ऐसा नगर निगम के नियमों में प्रावधान है। रामलीला मैदान नगर निगम की संपत्ति है।
नगर निगम राजनीतिक, सामाजिक एवं धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए रियायती दरों पर मैदान को किराए पर देती है। उसने मैदान का प्रतिदिन का किराया पांच हजार रुपये तय कर रखा है। मैदान किराए पर लेने के लिए बुकिंग कराने का प्रावधान है।
रामलीला मैदान में शपथ दिलाने का फैसला होने के बावजूद सोमवार की शाम तक दिल्ली सरकार ने रामलीला मैदान की बुकिंग की प्रक्रिया शुरू नहीं की थी। कार्यक्रम की सूचना के तौर पर मुख्य सचिव ने नगर निगम के आयुक्त को फोन किया है।
29 को नहीं पास होगा जनलोकपाल बिल
अरविंद केजरीवाल 29 दिसंबर को रामलीला मैदान में दिल्ली विधानसभा का सत्र बुलाकर जनलोकपाल बिल पास नहीं कर सकेंगे।
भाजपा पार्षद एवं उत्तरी दिल्ली नगर निगम की स्थाई समिति के अध्यक्ष योगेंद्र चंदोलिया ने 28 से 30 दिसंबर तक रामलीला मैदान बुक करा रखा है।
चंदोलिया के अनुसार मैदान में 29 दिसंबर को सत्संग होगा। उसकी तैयारी के लिए 28 दिसंबर को टेंट लगाया जाएगा और 30 दिसंबर को टेंट हटाया जाएगा।
विस चुनाव के दौरान अरविंद केजरीवाल ने ऐलान किया था कि उनकी सरकार बनने की स्थिति में वह 29 दिसंबर को रामलीला मैदान में विस का सत्र बुलाएंगे जिसमें जनलोकपाल बिल पास किया जाएगा।
दूसरी बार राजनिवास से बाहर होगा समारोह
दिल्ली के मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह दूसरी बार राजनिवास से बाहर होगा। वर्ष 1996 में मदनलाल खुराना के त्यागपत्र के बाद मुख्यमंत्री बने साहिब सिंह ने राजनिवास के बजाए छत्रसाल स्टेडियम में शपथ ली थी।
उनकी तरह अरविंद केजरीवाल भी राजनिवास में शपथ नहीं ले रहे। उन्होंने रामलीला मैदान में शपथ लेने का फैसला किया है।
भाजपा नेता मदनलाल खुराना और सुषमा स्वराज ने राजनिवास में शपथ ली थी। शीला दीक्षित ने तीनों बार राजनिवास में ही शपथ ली थी।