फरीदाबाद में बदलते वक्त के साथ रामलीलाओं का मंचन भी हाईटेक होने लगा है। समय के अभाव में अगर आप अपने परिवार के साथ रामलीला नहीं देख पाते हैं तो मलाल मत कीजिएगा।
पारंपरिक लीला का मंचन अब यू ट्यूब और फेसबुक पर भी देख सकेंगे। सेक्टर-15 की श्रद्धा रामलीला कमेटी इस बार कुछ ऐसा ही करने जा रही है।
रामलीला कमेटी 11 अक्तूबर से आयोजन शुरू करने जा रही है। रामलीला को हाईटेक रूप देने के लिए कमेटी ने ऑफिशियल वेबसाइट बनवा ली है।
रामलीला के मंचन की रिकॉर्डिंग रोजाना वेबसाइट के अलावा फेसबुक और यू-ट्यूब पर डाली जाएगी, ताकि कोई भी कहीं से भी लीला का मंचन देख सके।
वेबसाइट को डिजाइन करने वाले पुनीत ने बताया कि तैयारी पूरी है। हर रोज रामलीला मंचन की बेहतर क्वालिटी के कैमरों से रिकॉर्डिंग होगी और उसे वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। इसके अलावा रामलीला मंचन के दृश्य भी अपलोड किए जाएंगे।
रामलीला के सभी पात्रों की पूरी जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी। रामलीला मंचन के दृश्यों के साथ हिंदी डायलॉग ही नहीं बल्कि अंग्रेजी डायलॉग भी लिखे जाएंगे, ताकि देश में ही नहीं बल्कि विदेश में भी लीला का प्रचार हो सके।
एनसीआर का सबसे बड़ा मंच
रामलीला कमेटी के निदेशक अनिल चावला ने बताया कि इस बार रामलीला मंचन के लिए 40 फीट लंबा मंच तैयार किया जा रहा है। यह मंच एनसीआर का सबसे बड़ा मंच होगा।
रावण और दशरथ घोड़ों से अपने दरबार में पहुंचेंगे। हनुमान जी 35 फीट की ऊंचाई से उड़कर संजीवनी बुटी लाएंगे। वहीं, सीता और राम के लिए अलग से मनमोहक जहाज बनाया गया है। जिसमें राम स्वयंवर के लिए पहुंचेंगे।
देव भूमि उत्तराखंड संस्कृति मंच की ओर से सूर्य विहार में कुमाऊंनी रामलीला का अनूठा मंचन किया जाएगा। मंचन के दौरान कुमाऊं की संस्कृति की झलक यहां दिखाई देगी।
इस मंचन में लोकगीत ‘बेडु पाको बारो मासा’ कुमाऊं की खेती-बाड़ी, वहां के रहन-सहन पर आधारित सांस्कृति कार्यक्रम भी पेश किए जाएंगे। लीला में ब्रज के लोक गीतों और नौटंकी भी आकर्षण का केंद्र बनेगी।
मंच के निदेशक गोपाल गिरी ने बताया कि कुमाऊंनी भाषा में रामलीला करने का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को उत्तराखंड की संस्कृति से जोड़े रखना है। उन्होंने कहा कि शहर में बड़ी संख्या में उत्तराखंड के लोग रहते हैं।
जिनमें से बहुत से ऐसे लोग हैं जो कई वर्षों से अपने गांव नहीं गए। इसके अलावा फरीदाबाद में जन्मे बच्चों को भी उत्तराखंड धूमने-फिरने का मौका नहीं मिलता। ऐसे में 10 दिनों तक चलने वाली रामलीला मंचन में कुमाऊं की पूरी संस्कृति को विस्तार से दर्शाया जाता है।
दिखेगी कुमाऊं की संस्कृति
उन्होंने बताया कि रामलीला का मंचन 13 अक्तूबर से 23 अक्तूबर तक किया जाएगा। पिछले दो महीने से पात्र अभ्यास में जुटे हैं। इस दौरान सीता स्वयंवर, सुमंत का राम से आग्रह, सीता हरण, लक्ष्मण शक्ति, अंगद-रावण संवाद, मंदोदरी-रावण संवाद और राम-रावण युद्ध के प्रसंग मुख्य आर्कषण के केंद्र रहेंगे।
राम की भूमिका शेखर जोशी, सीता की हिमांशु रावत, लक्ष्मण की सूरज, रावण की गोदन सिंह नेगी, मेघनाथ की कुंदन सिंह, हनुमान की विपिन चंद्र, दशरथ की महेश, परशुराम की करण, सुमंत की बीडी पंत, सूपर्णखा की शेखर जोशी और सुग्रीव की भगतसिंह राणा निभाएंगे।