रामायण के जरिए आसियान देशों को जोड़ने वाली रामायण का हर देश में अपना अलग महत्व है। सूत्रों का कहना है कि थाईलैंड में रामाकीन करने वाले, लाओस में फा लाक फा लाम करने वाले, इंडोनेशिया में काकावीन करने वाले और मलेशिया में हिकायत सेरी रामा करने वाले कलाकार दिल्ली में होने वाले रामायण महोत्सव में भाग लेंगे। यह सारा कार्यक्रम कमानी सभागार में होगा।
इस सम्मेलन में 10 एशियाई देश इंडोनेशिया, सिंगापुर, वेतनाम, मलेशिया, थाईलैंड, लाओस, फिलीपींस और कंबोडिया के नेता अपने देश का प्रतिनिधत्व करेंगे और इस सम्मेलन में वह भारत के साथ 25 साल की साझेदारी को भी दिखाएंगे।
इस सम्मेलन की शुरुआत राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों होगी। इस मौके पर रामायण डाक टिकट भी जारी किया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि इस कार्यक्रम में सभी नेताओं को ये विकल्प दिया जाएगा कि वो या तो नेताओं के लिए रखी गई पार्टी या रात्रिभोज पर अपने पसंद की खादी जैकेट पहनें।
गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम के लिए एक बड़ा स्टेज बनाया जा रहा है और नेताओं का सिटिंग अरेंजमेंट भी फाइनल हो गया है। इसमें 10 नेताओं के एक साथ बैठने की व्यवस्था नहीं है।
इस तरह आसियान देशों के 10 में से 6 नेता अपनी पत्नियों के साथ राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू के साथ बैठेंगे।
इन सब के साथ ही असियान के जनरल सेक्रेटरी भी इस स्टेज पर होंगे। गणतंत्र दिवस की परेड के बाद शाम को राष्ट्रपति द्वारा दी जाने वाली एटहोम पार्टी में भी आसियान देशों के सभी नेता शामिल होंगे।
चूंकि इस बार गणतंत्र दिवस के मौके पर आसियान के सभी देशों के नेता हिस्सा लेंगे इसलिए इस बार के आयोजन पर चीन की कड़ी निगाह लगी होगी। यही वजह है कि भारत इस बार परेड में आईटीबीपी(इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस) के जवानों का मार्चिंग दस्ता भी शामिल करने की योजना बना रहा है।
अगर ऐसा हुआ तो आईटीबीपी का दस्ता दो सालों के अंतराल के बाद गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल होगा। इसके साथ ही भारत का मुख्य फोकस अपनी नौसेना की शक्ति का प्रदर्शन करने पर होगा। क्योंकि नौसैना ही महत्वपूर्ण रक्षा विभाग है जो भारत आसियान देशों केसाथ शेयर करता है।
सूत्रों के कहना है कि इस कार्यक्रम में 10 एशियाई नेताओं में से 6 का अपनी पत्नी के साथ आना पक्का है और इन सब के लिए अलग से कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया है। इनकी सुविधा के अनुसार इन्हें दिल्ली की ऐतिहासिक इमारतों और हैंडिक्राफ्ट से जुड़े स्थलों की सैर भी करायी जा सकती है।