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रूस तक है श्रीराम की लीला का मुरीद

Tue, 03 Feb 2015 08:21 PM IST
ओम प्रकाश/अमर उजाला, गुड़गांव
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आपको शायद ही पता होगा कि भगवान श्रीराम की लीला के मुरीद रूस तक हैं। वहां पर भी रामायण का मंचन होता है। लेकिन इसे धर्म से न जोड़कर पपेट थिएटर (कठपुतली रंगमंच) के रूप में देखा जाता है। इसकी एक झलक रूस के एक राज्य बशखिर के कलाकारों ने सरजकुंड मेले में दिखाई।
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इसमें सारे संवाद रूसी भाषा में हैं। रंगमंच रशियन है। म्यूजिक वहीं का है। पूरे रामायण को हम किसी मूक अभिनय तक आसानी से समझ सकते हैं। संवाद में पात्रों के नाम भर ही समझ आते हैं।

बशखिर स्टेट पपेट थिएटर 1932 से वहां सक्रिय है, जो भारतीय पौराणिक कथाओं पर कठपुतली रंगमंच प्रस्तुत करता है। पूरी रामायण करीब 45 मिनट में दिखाने वाले ये कलाकार रूसी लोगों को इसके जरिए यह समझा देते हैं कि बुराई पर अच्छाई की ही जीत होती है। इसी विधा में वह पंचतंत्र की कथाएं रशियन अंदाज में पेश कर लोगों को संदेश देते हैं।
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भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के जरिए बशखिर पपेट थिएटर ग्रुप यहां आया था। इन कलाकारों ने बताया कि रामायण का मंचन रूस में वे कठपुतली रंगमंच के जरिए वर्षों से करते आए हैं।

रंगकर्मी रामजी बाली कहते हैं कि श्रीराम कथा में वह सारे तत्व मौजूद हैं, जो इसे परफेक्ट ड्रामा बनाते हैं। इसीलिए इस कथा को रूस में पपेट थिएटर के रूप में पेश किया जा रहा है। रूस का भारतीय संस्कृति से काफी मेलजोल रहा है। यह इसका एक हिस्सा लगता है।

रंगकर्मी मनोज मदान के मुताबिक अपने देश के अलावा इंडोनेशिया, मलेशिया, मॉरीशस आदि में रामलीला पहले से होती रही है। रूस और अमेरिका की जानकारी यहां के लिए नई है।
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प्रस्तोता जैनेंद्र कुमार के मुताबिक रूसी कलाकारों की ओर से रामायण का मंचन अनोखे अंदाज में देखना अपने आप में विलक्षण था।

यह एक नया अनुभव है। ये कलाकार अपने देश में इसके जरिए बता रहे हैं कि सच कैसे जीत सकता है। इसमें भरपूर मनोरंजन है।
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