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पीएम मोदी ने बताया देश और दुनिया में किन-किन रूपों में मौजूद हैं भगवान राम, ईरान और चीन भी नहीं अछूते

Wed, 05 Aug 2020 03:11 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
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भूमिपूजन करते प्रधानमंत्री - फोटो : पीटीआई
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राम मंदिर के लिए आज भूमिपूजन का भव्य कार्यक्रम संपूर्ण हो चुका है। इस मौके पर तमाम विशेष अतिथियों की मौजूदगी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूमि पूजन किया। इसके बाद पीएम ने देश को संबोधित भी किया जिसमें उन्होंने लोगों को मंदिर निर्माण के माध्यम से देश के विकास की बात भी कही। इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि भगवान राम सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि विदेशों में भी राम लोगों को प्रभावित करते हैं।

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पीएम मोदी ने कहा कि भारत की आस्था में राम हैं, भारत के आदर्शों में राम हैं। भारत की दिव्यता में राम हैं, भारत के दर्शन में राम हैं। वह बोले कि, तुलसी के राम सगुण राम हैं, नानक और कबीर के राम निर्गुण राम हैं। अयोध्या बौद्ध और जैनधर्म की धूरि रही है। राम की यही सर्वव्यापकता भारत की विविधता में एकता का जीवन चरित्र है।

तमिल में कंब रामायण तो तेलुगु में रंगनाथ और रघुनाथ रामायण है। उड़िया में रुईपात कातेड़पति रामायण है तो कन्नड़ में कुमुदेंदु रामायण तो कश्मीर में रामवतार चरित मिलेगा। मलयालम में रामचरितम मिलेगी। बांग्ला में कृतिवास रामायण है तो गुरु गोविंद सिंह जी ने तो खुद गोविंद रामायण लिखी है।
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अलग-अलग रामायणों में राम भिन्न-भिन्न रूपों में मिलेंगे लेकिन राम सब जगह हैं, राम सबके हैं। इसलिए राम भारत की अनेकता में एकता के सूत्र हैं। पीएम आगे बोले, दुनिया में कितने ही देश राम के नाम का वंदन करते हैं। वहां के नागरिक खुद को श्रीराम से जुड़ा हुआ मानते  हैं। विश्व की सर्वाधिक मुस्लिम जनसंख्या जिस देश में है वो है इंडोनेशिया, वहां हमारे देश की तरह काकाविद रामायण, स्वर्णदीप रामायण, योगेश्वर रामायण जैसी कई अनूठी रामायण हैं। रामायण आज भी वहां पूजनीय है।



कंबोडिया में रमकेर रामायण, लाओस फ्रा लाक फ्रा लाम रामायण है। मलेशिया में हिकायत सेरी राम तो थाईलैंड में रामाकीन रामायण है। आपको ईरान तथा चीन में भी राम कथा का विवरण और राम के प्रसंगों का विवरण मिलेगा। श्रीलंका में रामायण की कथा जानकी हरण के नाम से सुनाई जाती है। नेपाल का तो राम से आत्मीय संबंध माता जानकी से जुड़ा है।

ऐसे ही दुनिया के न जाने कितने देश कितने छोर हैं जहां की आस्था हमें या अतीत में राम किसी न किसी रूप में रचे-बसे हैं। आज भी भारत के बाहर दर्जनों ऐसे देश हैं जहां, वहां की भाषा में रामकथा प्रचलित है।

मुझे विश्वास है कि आज इन देशों में भी करोड़ों लोगों को राम मंदिर निर्माण का काम शुरू होने से बहुत सुखद अनुभूति हो रही होगी। आखिरकार राम सबके हैं, राम सब में हैं। जीवन का ऐसा कोई पहलू नहीं है, जहां हमारे राम प्रेरणा न देते हों। भारत की ऐसी कोई भावना नहीं है जिसमें प्रभु राम झलकते न हों. भारत की आस्था में राम हैं, भारत के आदर्शों में राम हैं! भारत की दिव्यता में राम हैं, भारत के दर्शन में राम हैं।

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