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देश को राजनैतिक तौर पर सशक्त करने की जरूरत: राजनाथ सिंह

Tue, 08 Nov 2016 06:23 PM IST
अमित कुमार निरंजन/अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : अजय वर्मा
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सशक्त, स्वाभिमान और समृद्घ भारत बनाने के लिए गवर्नेंस के साथ लोगों को भी संवेदनशील होना पड़ेगा। इसके जरूरी है, ज्यादा से ज्यादा जानकारी डिज‌िटल रूप में सहेजी जाएं। साथ ही देश के लोगों को डिज‌िटली रूप से सशक्त करने की भी किया जाए।
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ताकि वे बिना आरटीआई लगाए भी सूचना प्राप्त कर सकें। केन्द्रीय सूचना आयोग के 11वें वार्षिक सम्मेलन में गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को डीआरडीओ भवन में यह बात कही।गृहमंत्री ने कहा कि मायगॉव डॉटइन से जनता और सरकार का संवाद बेहतर हुआ है। हमें इस माध्यम से जीएसटी के लिए 40 हजार सुझाव मिले। जितनी ज्यादा जानकारी वेबसाइट पर दी जाएंगी, पारदर्शिता भी उतनी ही ज्यादा बढ़ेगी।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार किसी को भी सूचना देने से डरती है, जनता को जो सूचना चाहिए हम उन्हें देंगे। लेकिन लोगों को सूचनाओं के ईको सिस्टम को समझना होगा कि आखिर किस स्तर तक सूचना मांगी जाए।
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'ज‌िनसे होती है मामला सुलझने की उम्मीद उन्हीं के पास जाते हैं लोग'

राज्य मंत्री डॉक्‍टर जितेंद्र सिंह ने बताया कि जब सरकार के दो साल पूरे हुए तो सरकार के पास करीब आठ लाख शिकायत पहुंची, जबकि पिछली सरकार में इनकी संख्या करीब दो लाख ही थी। तो लोगों ने पूछा कि मोदी सरकार से लोगों को कुछ ज्यादा ही शिकायत है तो मैंने उन्हें मिर्जा गालिब की शायरी से जवाब दिया।

मिर्जा गालिब अपनी शायरी में कह गए थे जिनसे लोगों को मामला सुलझने की उम्मीद होती है, लोग उन्हीं के पास ही तो शिकायत लेकर जाते हैं। उधर, केन्द्रीय सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त आरके माथुर ने बताया कि विभागों से ज्यादा से ज्यादा जानकारी खुद से ही (शो-मोटो)सार्वजनिक की जा रही है।

वहीं कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने यह घोषणा की कि कुछ माह बाद आरटीआई का एक एप लॉंच होगा,जिसके माध्यम से कोई भी मोबाइल से आरटीआई आवेदन कर सकता है।
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इशारों-इशारों में आरटीआई एक्ट को बताया "सरदर्द"

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह - फोटो : amar ujala
वार्षिक समारोह आरटीआई के दुरुपयोग की बात इशारों-इशारों में मंचासीन सदस्यों ने कह दी। मुख्य सूचना आयुक्त ने कहा कि अभी आयोग में एक ही आवेदक के हजारों के केस हैं। वहीं राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह ने बताया कई लोग रिटायर्ड होने के बाद आरटीआई लगाने के काम में ही मशगूल हैं।

उधर,केन्द्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने एक आरटीआई का जिक्र करते हुए कहा कि एक आवेदक ने पूछा कि अगर हम पर एलियन का अटैक हो गया तो हम उससे कैसे बचेंगे। इसके अलावा रेलवे मंत्रालय के अधिकारियों ने एक सर्वे का हवाला देते हुए कहा कि दो तिहाई रेलवे कर्मचारियों का मानना है कि आरटीआई से विभाग का काम प्रभावित होता है। आयोगों में इतना आता है खर्चा-
आरटीआई पर काम करने वाली संस्था कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव (सीएचआरआई) ने आयोगों में पर एक रिपोर्ट तैयार की। सीएचआरआई के सदस्य वेंकटेश नायक ने बताया कि रिपोर्ट के मुताबिक मिजोरम राज्य सूचना आयोग में एक केस के निपटारे पर साढ़े नौ लाख रुपए और सिक्किम में तीन लाख रुपए खर्च होते हैं। वहीं महाराष्ट्र राज्य सूचना आयोग में एक केस के निपटारे में दो हजार और केन्द्रीय सूचना आयोग में पौने चार हजार रुपए खर्च हो जाते हैं।
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