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रेलवे ने भरी नई उड़ान: देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को मिली हरी झंडी, जानें किसी रूट पर चलेगी सबसे पहले

Tue, 26 May 2026 09:58 PM IST
विकास कुमार पीटीआई, नई दिल्ली

सार

यह ट्रेन डीजल या बिजली के बजाय हाइड्रोजन ईंधन सेल का उपयोग करके बिजली उत्पन्न करेगी। इसका कुल बिजली उत्पादन 1,200 किलोवाट है और यह वितरित पावर रोलिंग स्टॉक (डीपीआरएस) तकनीक पर काम करेगी, जिसमें बिजली पूरे ट्रेन में वितरित होती है।
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हाइट्रोजन ट्रेन - फोटो : adobe stock
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विस्तार
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रेलवे मंत्रालय ने देश की पहली हाइड्रोजन-संचालित 10-कोच वाली डीईएमयू ट्रेन के संचालन को मंजूरी दी है। यह ट्रेन उत्तरी रेलवे क्षेत्र के तहत जिंद और सोनीपत के बीच चलेगी। इसकी अधिकतम गति 75 किलोमीटर प्रति घंटे होगी।

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डीपीआरएस तकनीक पर करेगी काम
यह ट्रेन डीजल या बिजली के बजाय हाइड्रोजन ईंधन सेल का उपयोग करके बिजली उत्पन्न करेगी। इसका कुल बिजली उत्पादन 1,200 किलोवाट है और यह वितरित पावर रोलिंग स्टॉक (डीपीआरएस) तकनीक पर काम करेगी, जिसमें बिजली पूरे ट्रेन में वितरित होती है। मंत्रालय की मंजूरी रिसर्च डिजाइन और मानक संगठन (आरडीएसओ) की तकनीकी स्वीकृति के बाद मिली। 

रेलवे के महाप्रबंधक को सौंपनी होगी रिपोर्ट
रेलवे सुरक्षा आयुक्त (सीसीआरएस) ने भी सुरक्षा परीक्षण किया था। अधिकारियों ने बताया कि मंजूरी का मतलब तुरंत संचालन शुरू होना नहीं है। कई अनुपालन प्रक्रियाएं और सत्यापन चरण अभी पूरे होने बाकी हैं। उत्तरी रेलवे के महाप्रबंधक को सभी अनुपालन रिपोर्ट जमा करनी होंगी। ये रिपोर्ट आरडीएसओ, सीसीआरएस और पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) जैसे अन्य वैधानिक प्राधिकरणों से संबंधित होंगी।

सुरक्षा और अनुपालन
पीईएसओ ने जिंद (हरियाणा) में संपीड़ित हाइड्रोजन गैस भरने का लाइसेंस दिया है। हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण और वितरण सुविधा पर लगे सेंसर धूल से खराब हो सकते हैं। सुरक्षित संचालन के लिए इनकी नियमित सफाई सुनिश्चित की जाएगी। उत्तरी रेलवे को महत्वपूर्ण भूमिकाओं में तैनात कर्मियों को उचित प्रशिक्षण देना होगा। इसमें हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग स्टेशनों और ऑनबोर्ड क्रू सदस्य शामिल हैं।
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रखरखाव और प्रारंभिक संचालन
यह ट्रेन केवल जिंद और सोनीपत खंड के बीच ही संचालित करने की अनुमति है। इसका रखरखाव दिल्ली के शकूरबस्ती में किया जाएगा। सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार, रखरखाव के लिए ट्रेन को डीजल लोकोमोटिव द्वारा शकूरबस्ती ले जाया जाएगा। प्रारंभिक तीन महीनों के लिए, ट्रेन के साथ प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारी रहेंगे। यह कर्मचारी रास्ते में आने वाली तकनीकी समस्याओं का समाधान करेंगे।
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