समय पर ले जाते अस्पताल तो बच जाती जान
परिजनों ने आरोप लगाया कि आशीष गली में डेढ़ घंटे पड़ा रहा, समय पर उसे अस्पताल ले जाया गया होता तो जान बच सकती थी। वहीं, पुलिस अधिकारी परिवार के आरोपों से इनकार कर रहे हैं, उनका कहना है कि सवा नौ बजे आशीष के गिरने का पता चला था। एंबुलेंस का इंतजार न करते हुए उसे एक ऑटो से अस्पताल ले जाया गया।
पुलिस की मिलीभगत से चल रहा जुए का अड्डा...
आशीष के परिजनों ने आरोप लगाया है कि मकान मालिक पुलिस की मिली भगत से जुए का अड्डा चला रहा था। परिवार के मुताबिक आशीष दूसरी बार वहां जुआ खेलने गया था। घर से वह दो लाख रुपये लेकर गया था। इसके अलावा उसने अपने दोस्त से 50 हजार रुपये उधार भी लिए थे। जुए के अड्डे पर आशीष का किसी से झगड़ा भी हुआ था। उन्हें आशंका है कि आशीष को किसी साजिश के तहत नीचे धक्का दिया गया है। यह हादसा नही बल्कि हत्या है। परिवार ने मामले की जांच कराने की मांग की।
उत्तर-पूर्वी जिला पुलिस उपायुक्त,वेद प्रकाश सूर्या ने बताया कि, सूचना के बाद दयालपुर पुलिस ने जुए के अड्डे पर छापा मारकर वहां से पांच लोगों को दबोचा। आशीष को फौरन अस्पताल पहुंचाया गया था, गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी गई है।