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पूर्व फौजी की OROP पर खुदकुशी पर सियासत: राजनैतिक बाजी मारने में सफल रहे राहुल गांधी

Fri, 04 Nov 2016 12:18 AM IST
राकेश भट्ट/अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : अमर उजाला
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पूर्व फौजी की खुदकुशी पर भले ही दलों पर राजनीति करने के आरोप लग रहे हो लेकिन कांग्रेसी इस मुद्दे पर राजनैतिक बाजी राहुल गांधी व कांग्रेस के हाथ में पाकर उत्साहित हैं। हालांकि इस मुद्दे पर सबसे पहले आम आदमी पार्टी ने स्टार्ट लिया लेकिन राहुल गांधी के एक ही दिन में दो बार हिरासत में होने व एसएचओ को हड़काने का वीडियो वायरल होने पर छाई रही कांग्रेस ही।
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पार्टी के रणनीतिकारों के इस मामले पर मिले फीडबैक का ही नतीजा रहा कि राहुल गांधी केजरीवाल से पहले ही राम किशन की अंत्येष्टि में शामिल होने बामला भिवानी पहुंच गए। इतना ही नहीं वापस दिल्ली पहुंचकर शाम को कांग्रेस के मार्च के दौरान फिर हिरासत में पहुंच गए।

दरअसल, पंजाब व उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के कारण कांग्रेस इस मुद्दे को चुनाव तक जिंदा रखना चाहती है। इससे पूर्व भी राहुल गांधी वन रैंक वन पेंशन के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते रहे हैं और वह जंतर मंतर पर पूर्व सैनिकों के धरने में भी शामिल हुए थे। इन दोनों राज्यों में सैनिकों व पूर्व सैनिकों की तादात काफी ज्यादा है।
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बुधवार को पूर्व फौजी रामकिशन ग्रेवाल की मौत की खबर के बाद सबसे पहले दिल्ली सरकार के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया व अन्य को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी सभी काम छोड़कर लेडी हार्डिंग अस्पताल के बाहर डट गए। लेकिन कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को दो बार हिरासत में लेने सहित दिन भर के अन्य घटनाक्रम में राहुल ही सुर्खियों में बने रहे।
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सड़कों पर उतरे पहली पंक्ति के नेता

- फोटो : अमर उजाला
दूसरी ओर कांग्रेस के रणनीतिकारों ने भी इस मुद्दे की गंभीरता को तुरंत भांप लिया और कार्यालय से बाहर कम ही दिखने वाले वरिष्ठ नेता अहमद पटेल जैसे पहली पंक्ति के सभी नेता सड़कों पर उतरकर नारेबाजी करते दिखे। वैसे जानकार यह भी मान रहे हैं कि पुलिस की गलती की वजह से राहुल गांधी को यह माइलेज मिला है।

राजधानी में इस मुद्दे पर राजनैतिक भूचाल आने के बाद बुधवार रात को पूर्व फौजी के शव का पोस्टमार्टम कर उसे भिवानी भेजने पर वहां केजरीवाल से पहले पहुंचने में भी राहुल गांधी ने सियासी बाजी मारी। इतना ही नहीं इस मामले में अपनी मौजूदगी को असरदार पाते हुए वह शाम के समय जंतर मंतर पर आगे बढ़ने की जिद में फिर हिरासत में चले गए।

हालांकि इसके बाद पहुंचे मुख्यमंत्री केजरीवाल ने एक करोड़ रुपये के मुआवजे की घोषणा व राम किशन ग्रेवाल को शहीद का दर्जा देकर बाजी राहुल से छीनने की कोशिश की। यानि भाजपा को घेरने के लिए कांग्रेस व आप इसके राजनीतिकरण में पीछे हटने को तैयार नहीं है। इसलिए मीडिया के पूछने पर केजरीवाल ने यहां पर यह भी बोल दिया कि हां हम सैनिकों की हक के लिए कर रहे हैं राजनीति।
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