-मस्जिद तक जाने का रास्ता खोलने की अपील, याचिकाकर्ता ने बताया ग्रेड-2 संरक्षित ढांचा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने जयपुर पोलो ग्राउंड परिसर में स्थित रेस कोर्स मस्जिद को तोड़े जाने से बचाने और वहां नमाज पढ़ने के लिए रास्ता खोलने की मांग पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार के वकील को निर्देश लेकर बृहस्पतिवार को फिर पेश होने को कहा। याचिका एक नमाजी सैयद अहमद सऊद ने दायर की है। उनका आरोप है कि अधिकारियों ने बिना किसी नोटिस या आदेश के उन्हें मस्जिद में जाने से रोक दिया है। याचिकाकर्ता ने इसे ग्रेड-2 संरक्षित ढांचा होने का दावा भी किया है।
न्यायमूर्ति अनीश दयाल की पीठ के सामने केंद्र सरकार के वकील आशीष दीक्षित ने बताया कि परिसर में एक मस्जिद और एक मंदिर है। फिलहाल मस्जिद को तोड़ने की कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि आसपास के अन्य निर्माण हटाने के दौरान लोगों की सुरक्षा को देखते हुए पहले मस्जिद की बिजली और पानी की आपूर्ति बंद की गई थी। याचिकाकर्ता के वकील एम सुफियान सिद्दीकी ने अदालत से अपील की कि मामले का फैसला होने तक लोगों को मस्जिद तक जाने और नमाज पढ़ने की अनुमति दी जाए।
याचिका के अनुसार, 21 अक्तूबर को सैयद अहमद सऊद अपने दोस्तों के साथ नमाज पढ़ने पहुंचे थे, लेकिन परिसर के प्रवेश द्वार पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। याचिकाकर्ता का कहना है कि मस्जिद वर्ष 1977 से अधिसूचित वक्फ संपत्ति है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मस्जिद एक ग्रेड-2 संरक्षित ढांचा है, इसलिए इसके स्वरूप में बदलाव करने से पहले संबंधित हेरिटेज एंड कंजर्वेशन कमेटी की मंजूरी जरूरी है।
झुग्गियां हटाने की कार्रवाई से जुड़ा है मामला
मस्जिद जयपुर पोलो ग्राउंड परिसर में स्थित है। इसके आस-पास भाई राम कैंप, मस्जिद कैंप और डीआईडी कॉलोनी नाम की झुग्गी बस्तियां हैं। केंद्र सरकार ने इन बस्तियों को संरक्षित क्षेत्र और एयर फोर्स स्टेशन के पास स्थित बताते हुए वहां से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की है। सरकार के अनुसार, यह कदम रक्षा ढांचे की सुरक्षा और अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक हितों को ध्यान में रखकर उठाया गया है।
धार्मिक पहचान और पहुंच का मुद्दा उठाया
केंद्र सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि अधिकारियों के सामने वक्फ बोर्ड और याचिकाकर्ता की ओर से दिए गए अनुरोध रखे गए हैं। संबंधित अधिकारी इन पर विचार कर निर्णय लेंगे। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि झुग्गी बस्तियों को हटाने से जुड़े विवाद में मस्जिद शामिल नहीं थी। ऐसे में मस्जिद तक पहुंच रोकना और उसके अस्तित्व को लेकर आशंका पैदा होना अनुचित है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 14 और 25 का हवाला देते हुए इसे समानता और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों से जुड़ा मामला बताया।