शांति एवं सद्भाव समिति की बैठक में सोमवार विधानसभा में की गई। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाया गया और पिछली बैठक में लगाए गए आरोप को भी संज्ञान में लिया गया। सद्भाव कमेटी के अध्यक्ष राघव चड्ढा की अध्यक्षता में कई गवाहों ने भी फेसबुक पर गंभीर आरोप मढ़ा।
बिजली, दूरसंचार के क्षेत्र में कार्यकर्ता प्रबीर पुरकायस्थ समिति के सामने स्पष्ट रूप से बताया कि फेसबुक के व्यापार मॉडल और लोगों की सक्रियता में वृद्धि के लिए घृणा को बढ़ावा देकर शांति-सद्भाव को बिगाड़ने के बीच सीधा संबंध है। फेसबुक ने एक संगठन के तौर पर इस तरह की स्थिति प्राप्त कर ली है कि वह भारतीय कानूनों द्वारा बाध्य नहीं है। फेसबुक का जहां मुख्यालय स्थित है वहां केवल अमेरिकी कानूनों द्वारा बाध्य है।
उन्होंने आगे कहा कि भारतीय संगठन की ओर से भड़काऊ और घृणित सामग्री को फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की शिकायत करने पर फेसबुक उदासीनता दिखाता है। लेकिन जब अमेरिका में इस तरह की खबरें उनके लिए शर्मनाक बन जाती हैं तो प्रतिक्रिया करता है। फेसबुक अपने बिजनेस मॉडल के माध्यम से कथित तौर पर नफरत को बढ़ावा देता है। क्योंकि इससे यह अधिक लोगों तक पहुंचा है।
फेसबुक पर शिकायत भेजने वाले व्यक्ति को यह जानने का अधिकार होना चाहिए कि उसकी शिकायत का क्या हुआ। लेखक प्रतीक सिन्हा ने समिति से कहा कि फेसबुक के कामकाज और संरचना में पूरी तरह से अस्पष्टता है इसका कारण संचालन में कोई पारदर्शिता नहीं होना है। उन्होंने दिल्ली दंगों के दौरान घटे विभिन्न घटनाक्रमों को विस्तृत रूप से साझा किया। दोनों गवाहों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ज्वलंत मुद्दों से निपटने और ढ़ांचागत सुधार को लेकर सुझाव विस्तृत तौर पर समिति को लिखित में देने का प्रस्ताव दिया है।