टेंडर प्रक्रिया में लगने वाला समय घटेगा, परियोजनाओं के अध्ययन से लेकर डीपीआर तक का काम समय से होगा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राजधानी में फ्लाईओवर और अंडरपास निर्माण परियोजनाओं की रफ्तार अब और तेज होगी। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) परियोजनाओं की समय पर पूर्ति और स्वीकृति प्रक्रिया को गति देने के लिए अब कंसल्टेंसी एजेंसियों का स्थायी पैनल बनाने की योजना पर काम कर रहा है। इन एजेंसियों की मदद से किसी भी नई सड़क या यातायात परियोजना की व्यवहार्यता रिपोर्ट और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तुरंत तैयार की जा सकेगी।
पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने बताया कि अब तक हर नई परियोजना के लिए अलग-अलग टेंडर प्रक्रिया अपनानी पड़ती थी, जिससे लगभग दो से तीन महीने का समय केवल एजेंसी चयन में ही लग जाता था। नई व्यवस्था में विभाग के पास पहले से ही विशेषज्ञ एजेंसियों का पैनल होगा। जब भी किसी इलाके में फ्लाईओवर या अंडरपास का प्रस्ताव आएगा, तो इन्हीं में से उपयुक्त एजेंसी को सीमित निविदा के जरिये चुना जाएगा और एक सप्ताह के भीतर काम शुरू हो सकेगा।
विभाग लगभग 25 से 30 अनुभवी एजेंसियों को पैनल में शामिल करने की योजना बना रहा है। इनमें वही कंपनियां होंगी जिन्होंने सीपीडब्ल्यूडी (केंद्रीय लोक निर्माण विभाग) या पीडब्ल्यूडी जैसी संस्थाओं के साथ काम किया है। इससे दिल्ली में ट्रैफिक सुधार से जुड़ी परियोजनाओं को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा सकेगा और शुरुआती स्तर पर लगने वाला समय काफी घटेगा।
गौरतलब है कि हाल ही में पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने सभी विधायकों और ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों से अपने-अपने क्षेत्रों में जाम के कारण बनने वाले बॉटलनेक्स की पहचान करने और समाधान सुझाने को कहा है। विभाग का लक्ष्य इन सुझावों के आधार पर स्थानीय जरूरतों के अनुरूप छोटे लेकिन प्रभावी इंफ्रास्ट्रक्चर समाधान तैयार किया जाए।
पैनल व्यवस्था लागू होने के बाद किसी भी प्रस्ताव को व्यवहार्यता अध्ययन से लेकर स्वीकृति चरण तक पहुंचाने में लगने वाला समय आधा रह जाएगा। इससे न केवल परियोजनाएं समयबद्ध रूप से पूरी होंगी, बल्कि राजधानी के कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक जाम की समस्या से भी राहत मिलेगी।